Nagaland Violence: जहां हुई शादी, चार दिन बाद वहीं हो गया दफन; उस काली रात से सिहर रहा ओटिंग गांव

Chhattisgarh Reporter
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छत्तीसगढ़ रिपोर्टर  

कोहिमा 07 दिसम्बर 2021। नगालैंड के मोन जिले में सुरक्षाबलों की कार्रवाई में 14 ग्रामीणों की मौत के बाद जब उनके शव ओटिंग गांव लौटे तो हर कोई सिहर उठा। इन शवों में एक शव 38वर्षीय होकुप का भी था, जिसकी शादी बीते सोमवार को ओटिंग गांव में ही हुई थी। मौत के बाद होकुप को उसी परिसर में दफना दिया गया, जहां उसकी शादी हुई थी। गांव के रहने वाले टी नहवांग बताते हैं कि होकुप की शादी में पूरा गांव शामिल हुआ था। किसी ने सोचा भी नहीं था कि एक सप्ताह बाद उसे यहीं पर दफन करना पड़ेगा। गांव वालों का कहना है कि इन मौतों के बदले सरकार हमें मुआवजा दे रही है। लेकिन उस पैसे से हमें न्याय नहीं मिलेगा। ग्रामीणों की मौत के बदले जिम्मेदार अधिकारियों को सजा मिलनी चाहिए। वे कहते हैं कि हम पुलिस, सेना या गांव को जिम्मेदार नहीं ठहरा रहे, लेकिन लापरवाही की सजा अधिकारियों को मिलनी ही चाहिए, यही हमारे साथ न्याय होगा। 

शादी में शामिल दो जुड़वा भाईयों की भी हुई मौत

होकुप की शादी में दो जुड़वा भाई लैंगवांग और थापवांग भी शामिल हुए थे। 25वर्षीय दोनों भाई शादी के बाद गांव से छह किलोमीटर दूर कोयले की खदान में काम करने के लिए रवाना हो गए। एक स्थानीय नागरिक के मुताबिक, यह खदान करीब 15 वर्षों से काम कर रही है और ओटिंग गांव के लिए आय का मुख्य स्रोत भी यही खदान है। दोनों जुड़वा भाई पिछले तीन साल से इसी खदान में काम कर रहे थे। पूरे सप्ताह इस खदान में काम करने के बाद शनिवार की रात चर्च सेवा के लिए वे अन्य साथियों के साथ गांव लौट रहे थे। उनकी यही यात्रा अंतिम यात्रा साबित हुई और वे कभी घर वापस नहीं लौट पाए। 

पूरा गांव कर रहा विरोध 

सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बाद भड़की हिंसा के बाद अब ओटिंग गांव शांत है। लेकिन यहां के हर एक घर में इस कार्रवाई का विरेाध हो रहा है। महिलाओं ने काले झंडे बनाए हैं, जिन्हें कारों व बाइकों में लगाया गया है। 

गलत पहचान के कारण हुई थी मौत

मोन जिले में बीते शनिवार की रात सुरक्षा बलों ने गलती से ग्रामीणों को उग्रवादी समझ लिया और उन पर गोलियां बरसा दीं। इस कार्रवाई में अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है। असम राइफल्स का कहना है कि उन्हें उग्रवादियों को लेकर खुफिया जानकारी हाथ लगी थी, इसीलिए सुरक्षाबलों की ओर से घेराव किया गया था, लेकिन इसी दौरान वहां ग्रामीण आ गए, जिन्हें गलती से उग्रवादी समझ लिया गया। इस मामले में सरकार की ओर से एसआईटी का गठन किया गया है तो असम राइफल्स ने भी कोर्ट ऑफ इंक्वायरी बिठा दी है। 

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