अकेली महिला ने गांव में जला दी शिक्षा की अलख, 140 बालिका बनी स्टेट खिलाड़ी

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छत्तीसगढ़ रिपोर्टर

दौसा 08 मार्च 2026। महिला शिक्षिका ललिता रानी ने अकेले दम पर आदिवासी बाहुल्य गांव में शिक्षा और खेलों की अलख जगा दी है। पहले इस इलाके में बेटियां खेलों में हिस्सा नहीं लेती थीं और समाज में फैली भ्रांतियों के चलते माता-पिता उन्हें खेलने नहीं भेजते थे। लेकिन ललिता रानी ने इस हालात को बदलने का बीड़ा उठाया। आज इस गांव की 140 से ज्यादा बेटियां कुश्ती, कबड्डी और जूडो में राज्य स्तर पर खेल रही हैं। वहीं, चार लड़कियां बीपीएड कर रही हैं और कई बालिकाएं शहर जाकर नौकरी कर रही हैं। राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल भंडाना की महिला पीटीआई ललिता रानी ने अपने प्रयासों से ग्रामीण बाहुल्य इलाके की बच्चियों को खेलों में आगे बढ़ाया। उनकी पहली नियुक्ति लाडली का बास स्कूल में हुई थी।

बच्चियों को खेलने से रोकते थे परिजन
साल 2009 से 2016 तक इस गांव की अधिकांश बालिकाएं स्कूल में खेलों में भाग नहीं लेती थीं। यदि कोई खेलना चाहती भी, तो परिजन अनुमति नहीं देते थे। इसका मुख्य कारण समाज में शहरी वातावरण और बेटियों की शिक्षा को लेकर फैली भ्रांतियां थी। बच्चियों को छोटी उम्र में ही घरेलू कामकाज में लगा दिया जाता था और उनकी शादी जल्दी कर दी जाती थी। इसके चलते गांव में शिक्षा और खेलों का स्तर बेहद खराब था।

ललिता रानी ने 2017 से की बदलाव की शुरुआत 
2017 में ललिता रानी ने बेटियों के खेलों के प्रति फैली भ्रांतियों को दूर करने का बीड़ा उठाया। उन्होंने गांव के हर घर जाकर लोगों को खेलों के महत्व के बारे में बताया। इसके अलावा, उन्होंने अपने स्कूल से पहल की और संसाधन जुटाकर लड़कियों को खेलों में शामिल कराया। जिला स्तर पर मेडल दिलाकर लोगों के सामने उदाहरण पेश किया। धीरे-धीरे लोगों ने भरोसा किया और अब वे अपनी बेटियों को खेलने भेजने लगे।

आज गांव की बेटियों का प्रदर्शन
ललिता रानी के प्रयासों से आज लाडली का बास और भंडाना गांव की 140 से ज्यादा बालिकाएं राज्य स्तर पर कुश्ती, कबड्डी और जूडो खेल रही हैं। कई बालिकाएं टीचर ट्रेनिंग ले रही हैं। स्कूल में खेल मैदान नहीं होने के कारण जनसहयोग से खेल मैदान बनवाया गया और कुश्ती-जूडो के लिए गद्दे किराए पर लेकर बच्चियों को प्रशिक्षण दिया गया।

मेडल जीत रही बेटियां
लाडली का बास स्कूल की 10 बालिकाएं जिला स्तर पर गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं, जबकि 90 बालिकाएं राज्य स्तर पर कांस्य पदक जीत चुकी हैं। चार बालिकाएं सरकारी नौकरी की ट्रेनिंग ले रही हैं। भंडाना सीनियर सेकेंडरी स्कूल में खेल मैदान और प्रशिक्षण से 30 बालिकाओं को राज्य स्तर पर खेलाकर स्कूल का नाम रोशन किया गया। पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी घनश्याम मीणा का कहना है कि पीटीआई ललिता रानी जिले की बालिकाओं के लिए मसीहा बन गई हैं।

ललिता को उनके पति का भी मिला सहयोग
ललिता रानी ने बताया कि समाज में बेटियों को लेकर फैली कुरीतियों के कारण माता-पिता उन्हें गांव से बाहर स्कूल नहीं भेजते थे। अपनी नौकरी और शिक्षा की उच्च उपलब्धि ने उन्हें प्रेरित किया कि वे गांव की बच्चियों को खिलाड़ी बनाएं। उनके प्रयासों में उनके पति का भी भरपूर सहयोग रहा।

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