सपना साकार: रेणुका ने कहा- टीम इंडिया की जर्सी पहनकर पूरी करूंगी पापा की इच्छा

Chhattisgarh Reporter
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छत्तीसगढ़ रिपोर्टर  

नई दिल्ली 30 अगस्त 2021। आज पापा होते तो मुझे टीम इंडिया में देखकर बहुत खुश होते। वह चाहते थे कि उनका कोई बच्चा भारतीय क्रिकेट टीम से खेला। भाई तो जिम्मेदारियों के बोझ के चलते खेल नहीं पाया पर मुझे यहां तक पहुंचाने में मां का पूरा साथ दिया। मां और भाई के त्याग और अपनी कड़ी मेहनत से मैंने भारतीय महिला टीम में जगह बनाकर पापा का सपना तो पूरा कर दिया। अब टीम इंडिया की जर्सी में मैदान पर उतरकर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर उनकी आखिरी तमन्ना पूरी करना चाहती हूं। वह जहां भी होंगे यह सब देखकर बहुत खुश होंगे। ऑस्ट्रेलिया में अगर मुझे मौका मिलता है तो मैं अपना सौ फीसद दूंगी। यह कहना है पहली बार भारतीय महिला क्रिकेट टीम में जगह बनाने वाली रेणुका सिंह ठाकुर का।

तीन साल की उम्र में हो गया था पिता का निधन 

रेणुका के पिता का 22 साल (1999) पहले निधन हो गया था जब वह तीन साल की थी। मां सुनीता ठाकुर ने कड़ी मेहनत से बेटे और बेटी को न सिर्फ पढ़ाया बल्कि अपने पैरों पर खड़ा होने के काबिल भी बनाया। रेणुका के पिता केहर ठाकुर दिग्गज विनोद कांबली के बहुत बड़े प्रशंसक थे। इसी के चलते उन्होंने बेटे का नाम भी विनोद रखा। वे चाहते थे कि उनका बेटा या बेटी कांबली की तरह टीम इंडिया से खेले। सुनीता ने पति को इच्छा को पूरा करने के लिए बेटी को मैदान में उतार दिया। स्थानीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन करने वाली रेणुका के ताऊ भूपेंद्र ठाकुर ने 13 साल की उम्र में चयन हिमाचल प्रदेश क्रिकेट संघ की धर्मशाला अकादमी में करवाया दिया। उसके बाद से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 

इनस्विंग में महारथी 

कोच पवन सेन ने कहा कि रेणुका की लाइन एंड लेंथ बहुत बढ़िया है। उनकी इनस्विंग बहुत शानदार है। ऑस्ट्रेलिया की तेज पिचों पर इसका उन्हें फायदा मिलेगा। मुझे पूरा विश्वास है कि वह अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहेगी। वर्ष 2019 में राष्ट्रीय वनडे टूर्नामेंट में 23 विकेट चटकाकर रेणुका सुर्खियों में आईं थी। इसके बाद उनका चयन इंडिया ए टीम में हुआ था। ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया में ही उन्हें एक मैच खेलने का मौका मिला था।  

तीसरी हिमाचली खिलाड़ी 

रेणुका भारतीय टीम में जगह बनाने वाली हिमाचल प्रदेश की तीसरी महिला क्रिकेटर हैं। रेणुका से पहले सुषमा वर्मा और हरलीन देओल यह उपलब्धि हासिल कर चुकी हैं। हालांकि हरलीन चंडीगढ़ से लेकिन वह घरेलू क्रिकेट में हिमाचल के लिए खेलती हैं। हरलीन भी ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए टीम में शामिल हैं। 

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