दुश्मनों के रडार को चकमा देने की तकनीक तैयार कर रहा जोधपुर डीआरडीओ

Chhattisgarh Reporter
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छत्तीसगढ़ रिपोर्टर  

जोधपुर 26 अगस्त 2021। राजस्थान में जोधपुर की रक्षा प्रयोगशाला व अनुसंधान संगठन डीआरडीओ ने देश के विमानों को सुरक्षित करने की चैफ टेक्नीक को ना सिर्फ डेवलप किया, बल्कि प्रोडक्शन का जिम्मा भी संभाला है। अब भारत इस टेक्नोलाजी के लिए विदेशी कंपनी पर निर्भर नहीं है। जोधपुर की रक्षा प्रयोग में देश की वायुसेना की वार्षिक एक लाख कार्टिज की खपत को पूरा करने के लिए चेफ प्रोडक्शन प्लांट लगा दिया है। यह जानकारी बुधवार को मीडियाकर्मियों को देते हुए डीआरडीओ के डायरेक्टर रविन्द्र कुमार ने बताया कि यहां नेवी की चेफ डिमांड का प्रोडक्शन भी किया जाएगा। पहले इस प्रोडक्ट के लिए अरबों डालर देकर विदेशों से खरीदा जाता था। कुल मिलाकर अब यह जोधपुर में ही तैयार होगा। इससे भारत की मुद्रा विदेश जाने से बचेगी। यह रक्षा क्षेत्र में भारत के आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने बताया कि यह एक टेक्नालोजी है, जो फाइटर प्लेन को दुश्मन के रडार से बचाएगी। यह विमान को अदृश्य कर देगा यानी भारत के फाइटर प्लेन पर अगर दुश्मन के रडार मिसाइल से हमला हो, तब पायलट प्लेन से चैफ इजेक्ट करते ही प्लेन अदृश्य हो जाएगा। चैफ आभासी क्लाउड तैयार करता है और मिसाइल ऐसीउस ओर डाइवर्ट हो जाती है और लडाकु विमान को वहां से गायब होने का समय मिल जाता। इससे फाइटर प्लेन सुरक्षित हो जाता है।उन्होंने कहा कि भारत पहले इस टेक्नोलाजी में प्रयोग होने वाले चैफ कार्टेज के लिए विदेशी कम्पनी पर निर्भर था। इस वजह से दुश्मन देश को भी इस टेक्नोलॉजी का पता था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विदेशों आयात होने वाले प्रोडक्शन पर रोक लागाने की लिस्ट में चैफ भी था। इस पर इस टेक्नॉलोजी में काम आने वाले फाइबर को जोधपुर के रक्षा अनुसंधान में कार्यरत माइक्रो बायोलॉजी एक्सपर्ट विशेषज्ञ प्रशांत ने इसे जोधपुर में डेवलप किया और इसके प्रोडक्टशन का प्लांट भी स्थापित किया।

बाल से चार गुना पतला सिंथेटिक फाइबर

चैफ में बाल से भी चार गुना पतला सिंथेटिक फाइबर होता है। जिसको एक कार्टेज में भरा जाता है। डीआरडीओ डायरेक्टर रविन्द्र कुमार ने बताया कि विदेश से आने वाला चैफ एल्युमिनीयम कोटेड ग्लास होता था, लेकिन पूर्ण रूप से स्वदेशी चैफ फाइबर हाइड्रोफोबिक कोटिंग से निर्मित है, इसकी एफिसियेंसी एक चौथाई ज्यादा है। जो कि तेजी से फैल कर आभासी क्लाउड तैयार करता है। यह एनवायमेंट फ्रेंडली है और सस्ता भी है। 

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