33.1 इंच बारिश, 32 जिले अब भी पिछड़े

छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
भोपाल, 18 सितंबर 2026। मध्य प्रदेश में मानसून विदाई की ओर बढ़ रहा है, लेकिन जाते-जाते बारिश का एक और दौर प्रदेश को मिल सकता है। मौसम अरुण शर्मा के अनुसार, 18 से 21 सितंबर तक प्रदेश में बारिश, गरज-चमक और आंधी की गतिविधियां बनी रहेंगी। 22 सितंबर से बारिश सीमित होने लगेगी। यानी मानसून की सक्रियता अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। प्रदेश में अब तक 842.1 मिमी यानी 33.1 इंच बारिश हो चुकी है। यह सामान्य बारिश 905.3 मिमी यानी 35.6 इंच से करीब 2.5 इंच कम है। इस तरह सीजन में अब तक बारिश सामान्य से 7 प्रतिशत कम है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में कमी ज्यादा है, जबकि पूर्वी हिस्से में स्थिति लगभग सामान्य के आसपास पहुंच गई है।
आखिरी दौर की बारिश से सुधर सकती है तस्वीर
मौसम विशेषज्ञ के मुताबिक, मानसून की विदाई सितंबर के आखिरी सप्ताह में शुरू होने का अनुमान है। शुरुआत पश्चिमी राजस्थान से हो सकती है। इसके बाद मध्य प्रदेश में भी इसकी सक्रियता धीरे-धीरे कम होगी। ऐसे में अगले चार-पांच दिन की बारिश उन जिलों के लिए अहम हैं, जहां अभी सामान्य से कम पानी गिरा है। फिलहाल 18 जिलों में सामान्य या सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज हुई है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया शामिल हैं। इसके उलट इंदौर, उज्जैन और जबलपुर समेत 37 जिलों में बारिश सामान्य से कम है। आलीराजपुर में सामान्य की करीब आधी बारिश ही हुई है, जबकि निवाड़ी में सामान्य से 54 प्रतिशत ज्यादा पानी गिर चुका है।
अरब सागर से लेकर बंगाल की खाड़ी तक कम दबाव क्षेत्र
मौसम विभाग के अनुसार, सौराष्ट्र और उससे लगे उत्तर-पूर्वी अरब सागर पर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण समुद्र तल से करीब 5.8 किमी की ऊंचाई तक फैला है। मानसून ट्रफ भी राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल होते हुए बंगाल की खाड़ी तक बनी हुई है। इन मौसम प्रणालियों से मध्य भारत में नमी मिल रही है। इसी वजह से 18 और 19 सितंबर को प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश के दौर जारी रह सकते हैं। 19 सितंबर के बाद एक और सिस्टम बनने के संकेत हैं। उत्तर थाईलैंड के ऊपर बना ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण 18 सितंबर की शाम तक उत्तर अंडमान सागर के आसपास पहुंच सकता है। इसके प्रभाव से 19 सितंबर की शाम उत्तर अंडमान सागर में नया कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके बाद इसके दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश तट की ओर बढ़ने के संकेत हैं। इसका असर मध्य प्रदेश के मौसम पर भी पड़ सकता है।
गुरुवार को भोपाल समेत कई जगह तेज बारिश
इस बीच गुरुवार को भोपाल, सीहोर और देवास में तेज बारिश हुई। भोपाल में दोपहर के समय करीब आधे घंटे तक तेज पानी गिरा। आष्टा में भी मूसलधार बारिश हुई। भोपाल-इंदौर रोड पर सोनकच्छ में बारिश के दौरान कुछ देर के लिए दिन में ही अंधेरा जैसा माहौल बन गया और वाहन चालकों को हेडलाइट जलानी पड़ी। ग्वालियर में भी दिनभर की उमस के बाद शाम को हुई बारिश से लोगों को राहत मिली।
32 जिलों में अब भी बारिश की कमी
प्रदेश के 32 जिलों में सामान्य से 4 से 50 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज हुई है। पूर्वी हिस्से में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग की स्थिति अब करीब सामान्य है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडोरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में 4 से 25 प्रतिशत तक कमी है। पिछले सप्ताह की बारिश से इन आंकड़ों में सुधार हुआ है। पश्चिमी हिस्से में कमी ज्यादा है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा समेत कई जिलों में 4 से 50 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है।
जून की कमी अब भी पूरी नहीं हुई
इस मानसून की सबसे बड़ी कमी जून में रही। प्रदेश में जून में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई के शुरुआती दिनों में तेज बारिश से स्थिति कुछ सुधरी, लेकिन बाद में मानसून दो बार ब्रेक हुआ। जुलाई के आखिरी सप्ताह में मजबूत मौसम प्रणाली सक्रिय हुई, फिर भी जुलाई में बारिश सामान्य से 13 प्रतिशत कम रही। जुलाई और अगस्त का बारिश कोटा पूरा हो गया, लेकिन जून की कमी पूरी नहीं हो सकी। यही वजह है कि पूरे मानसूनी सीजन में अब तक प्रदेश 7 प्रतिशत बारिश की कमी में है।


