पीठ दर्द को न करें नजरअंदाज! इसके पीछे छिपे हो सकते हैं कई कारण

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छत्तीसगढ़ रिपोर्टर

बिलासपुर 03 जून 2026। पीठ या कमर दर्द एक ऐसी समस्या है जिससे लगभग हर व्यक्ति कभी न कभी परेशान होता है। कई लोग इसे सामान्य थकान, गलत तरीके से बैठने या ज्यादा काम करने का नतीजा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, यदि पीठ दर्द बार-बार हो रहा है या लंबे समय तक बना रहता है, तो यह रीढ़ की हड्डी, नसों या हड्डियों से जुड़ी किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। डॉक्टर के अनुसार, करीब 90 प्रतिशत लोग पीठ दर्द को मामूली समझकर अनदेखा कर देते हैं, जिससे बाद में समस्या और बढ़ सकती है।

क्यों होता है पीठ दर्द?

पीठ दर्द एक आम समस्या है, लेकिन इसके पीछे कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं। कभी-कभी यह लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने, गलत तरीके से वजन उठाने या मांसपेशियों में खिंचाव के कारण होता है, जबकि कई मामलों में यह रीढ़ की हड्डी, नसों, डिस्क या हड्डियों से जुड़ी गंभीर समस्याओं का संकेत भी हो सकता है। यदि पीठ दर्द बार-बार हो रहा है या लंबे समय तक बना रहता है, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय इसके कारण का पता लगाना जरूरी है।

मांसपेशियों में खिंचाव

पीठ दर्द का सबसे आम कारण मांसपेशियों में खिंचाव होता है। भारी सामान उठाने, गलत तरीके से वजन खींचने या अचानक झुकने से रीढ़ के आसपास की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है। बार-बार ऐसा होने पर मांसपेशियों में ऐंठन और लगातार दर्द की समस्या हो सकती है।

डिस्क से जुड़ी समस्या

रीढ़ की हड्डी कई कशेरुकाओं (Vertebrae) से मिलकर बनी होती है और इनके बीच डिस्क होती है, जो कुशन का काम करती है। जब इनमें से कोई डिस्क खिसक जाती है, फट जाती है या उभर जाती है, तो वह आसपास की नसों पर दबाव डाल सकती है। इससे कमर से लेकर पैरों तक दर्द महसूस हो सकता है। इस स्थिति को आमतौर पर साइटिका कहा जाता है।

स्कोलियोसिस (Scoliosis)

स्कोलियोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें रीढ़ की हड्डी सामान्य रूप से सीधी रहने के बजाय एक तरफ मुड़ जाती है। यह समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन मध्य आयु में इसके कारण पीठ दर्द की शिकायत बढ़ सकती है।

गठिया

ऑस्टियोआर्थराइटिस भी पीठ दर्द का एक प्रमुख कारण है। इस स्थिति में रीढ़ के जोड़ों के कार्टिलेज धीरे-धीरे घिसने लगते हैं, जिससे दर्द और अकड़न महसूस हो सकती है। गंभीर मामलों में यह स्पाइनल स्टेनोसिस का रूप ले सकता है, जिसमें रीढ़ की हड्डी के आसपास की जगह संकरी हो जाती है।

ऑस्टियोपोरोसिस

ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियां कमजोर और पतली हो जाती हैं। इससे रीढ़ की हड्डी की कशेरुकाओं में छोटे-छोटे फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ जाता है। ये फ्रैक्चर काफी दर्दनाक हो सकते हैं और लंबे समय तक परेशानी का कारण बन सकते हैं।

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