
छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
लखनऊ 28 फरवरी 2026। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के आशियाना के सेक्टर एल निवासी पैथोलॉजी संचालक एवं शराब कारोबारी मानवेंद्र सिंह (49) की हत्या उनके बेटे अक्षत ने शराब के नशे में की थी। पुलिस को दिए बयान में आरोपी ने बताया है कि उसके पिता किसी कार्यक्रम से आए थे। वह काफी नशे में थे। पिता के आने से पहले अक्षत ने भी शराब पी रखी थी।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, नशे में मानवेंद्र ने अक्षत को काफी भला-बुरा कहा था। अक्षत भी नशे में था। ऐसे में उसे पिता की बात काफी बुरी लगी थी। यही वजह है कि उसने मानवेंद्र के लाइसेंसी राइफल से उन्हें गोली मार दी थी। आरोपी ने जेल जाने से पहले पुलिसकर्मियों से छोटी बहन कृति से मिलने की इच्छा जताई थी। इसके बाद कृति को पुलिसकर्मी थाने लेकर पहुंचे थे। बहन को सामने देखकर अक्षत उससे लिपटकर खूब रोया था। अक्षत ने पुलिस को दिए बयान में कहा है कि उसकी बहन को गंभीर बीमारी है। अक्षत ने पुलिसकर्मियों से अपना फोन वापस मांगा, ताकि वह बहन के खाते में रकम ट्रांसफर कर सके। हालांकि, आरोपी का मोबाइल फोन फोरेंसिक जांच के लिए जब्त कर लिया गया था। अक्षत ने बहन से बोला कि उसके खाते में 22 हजार रुपये हैं। इसमें से छह हजार रुपये वर्धमान पैथालॉजी के एक क्लर्क को बतौर वेतन देना है। शेष रकम वह अपने पास रख लेगी।
कृति गुमसुम, नहीं कर रही किसी से बात
आरोपी ने बहन को घर में रखे कुछ पैसों की भी जानकारी दी थी, ताकि कृति को कोई परेशानी न हो। इस वारदात के बाद से कृति बेहद गुमसुम है। वह किसी से भी ज्यादा बात नहीं कर रही है। कम उम्र में कृति ने मां को खो दिया और अब पिता की भी जान चली गई। वहीं, भाई जेल में बंद है।
पूरी रात बैठकर बड़बड़ाता रहा अक्षत
इससे पहले, पिता का हत्यारोपी बेटा अक्षत बुधवार की रात जेल में सो नहीं सका। वह पूरी रात बड़बड़ाता रहा। आरोपी को जेल अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां पर चिकित्सक उसकी निगरानी कर रहे हैं। जेल प्रशासन के समझाने पर अक्षत ने बृहस्पतिवार को दोपहर में थोड़ा खाना खाया। हालांकि, रात में फिर उसने खाने से मना कर दिया।
आरोपी की निगरानी के लिए दो लोग लगाए
पूरी रात आरोपी दीवार के सहारे बैठा रहा। पूछने पर आरोपी ने बताया कि उसे पहले पापा ने पीटा था, जिसके बाद उसने उन्हें गोली मार दी। आरोपी की निगरानी के लिए दो लोगों को लगाया गया है। आरोपी की हरकतों पर भी नजर रखी जा रही है। अक्षत की काउंसिलिंग की जा रही है। वह रात में रो रहा था और अपनी करतूत पर पछतावा भी कर रहा था।
बुधवार को मीडिया के सामने किया गया था पेश
लखनऊ में पैथोलॉजी संचालक मानवेंद्र सिंह की हत्या के आरोप में उनके बेटे अक्षत को पुलिस ने बुधवार को मीडिया के सामने पेश किया। अक्षत पर अपने पिता की हत्या का आरोप है, जिसे उसने 20 फरवरी को अंजाम दिया था। पुलिस के अनुसार, अक्षत ने पूछताछ में हत्या को गलती बताया, लेकिन इस जवाब से कोई संतुष्ट नहीं है। मानवेंद्र सिंह लखनऊ के आशियाना के सेक्टर एल के निवासी थे और शराब का कारोबार भी करते थे। पुलिस ने बताया कि मानवेंद्र अपने बेटे अक्षत पर डॉक्टर बनने का लगातार दबाव बना रहे थे। अक्षत ने दो बार नीट परीक्षा दी थी, लेकिन दोनों बार वह इसमें असफल रहा था। इसके बावजूद, मानवेंद्र उससे लगातार परीक्षा की तैयारी करने के लिए कहते रहते थे। इसी बात को लेकर 19 फरवरी की देर रात पिता और पुत्र के बीच तीखी बहस हुई थी।
इस बहस से नाराज होकर अक्षत ने 20 फरवरी की तड़के अपने पिता की हत्या कर दी। उसने अपनी लाइसेंसी राइफल का उपयोग करके मानवेंद्र के सिर में गोली मार दी थी। हत्या के बाद अक्षत ने अपने पिता के शव के टुकड़े-टुकड़े कर दिए थे। पुलिस इस मामले की गहनता से जांच कर रही है और आगे की कार्रवाई जारी है।
बुधवार को आरोपी से ये भी पूछा गया कि पूरे घटनाक्रम में उसकी बहन की क्या भूमिका है। जवाब में सिर हिलाते हुए अक्षत ने बताया कि उसकी बहन की कोई गलती नहीं है। वह किसी भी प्रकार से इसकी जिम्मेदार नहीं है। पुलिस ने आरोपी को बुधवार को सीजेएम कोर्ट में भी पेश किया। सीजीएम कोर्ट ने आरोपी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अक्षत से कई सवाल पूछे गए। हर सवाल पर आरोपी चुप्पी साधे रहा।
पूछताछ में उसने खुलकर बताई पूरी कहानी
पिता का कत्ल करने के बाद भी आरोपी अक्षत के चेहरे पर कोई सिकन नहीं दिखी। वह बिल्कुल सामान्य नजर आया। ऐसा लग रहा था कि उसने कोई अपराध ही नहीं किया हो। पूछताछ में भी उसने पुलिस को पूरी कहानी खुलकर बता दी। बुधवार को जब उसे पुलिस कोर्ट लेकर जा रही थी, तब भी आरोपी के व्यवहार में कोई बदलाव देखने को नहीं मिला।
नादरगंज में फेंके थे काटे गए अंग
अक्षत ने पुलिस को बताया कि उसने मानवेंद्र के हाथ और पैर काटकर उसे पॉलिथीन में भरा था। इसके बाद नादरगंज इलाके में नहर किनारे झाड़ियों में फेंक दिया था। धड़ को नीले ड्रम में भरकर घर में छिपाकर रखा था।


