नीति आयोग की बैठक में शामिल हुए सीएम हेमंत सोरेन, झारखंड की विशिष्ट जरूरतों को रखा केंद्र के समक्ष

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छत्तीसगढ़ रिपोर्टर

नई दिल्ली 25 मई 2025। नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग की 10वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक हुई। इसमें झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हिस्सा लिया और राज्य की जरूरतों और विकास के मुद्दों को मजबूती से उठाया। बैठक में देश के अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री, राज्यपाल और वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत की कल्पना विकसित राज्यों और गांवों से होती है। गरीबी हटाना, महिला सशक्तिकरण, युवाओं को हुनर देना, किसानों की तरक्की, शिक्षा, आधारभूत ढांचा और तकनीकी विकास पर राज्य सरकार लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि झारखंड सरकार लगभग 50 लाख महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये की सहायता दे रही है, जिससे उनका सशक्तिकरण हो रहा है।

खनन कंपनियों पर 1.40 लाख करोड़ रुपये बकाया
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में खनिज और कोयले की भरमार है, लेकिन खनन से प्रदूषण और विस्थापन जैसी समस्याएं भी हैं। खनन कंपनियों पर एक लाख चालीस हजार चार सौ पैंतीस करोड़ रुपये का बकाया है, जो जल्द से जल्द मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि खनन के बाद कंपनियों को जमीन राज्य सरकार को वापस करनी चाहिए और अवैध खनन के लिए उनकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोल-बेस्ड मीथेन गैस का इस्तेमाल कर ऊर्जा उत्पादन किया जा सकता है और कंपनियों को कैप्टिव प्लांट लगाना जरूरी किया जाना चाहिए। इसके अलावा, उत्पादन का 30% राज्य में उपयोग होने से रोजगार बढ़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड का वन क्षेत्र पूर्वोत्तर राज्यों जैसा है, इसलिए यहां आधारभूत ढांचे के लिए मंजूरी मिलने में देरी होती है। झारखंड को भी पूर्वोत्तर राज्यों की तरह विशेष सहायता मिलनी चाहिए।

रेल और परिवहन व्यवस्था मजबूत करने की मांग
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में रेल सेवाओं का विस्तार जरूरी है। कंपनियों के CSR और DMFT फंड को राज्य सरकार की प्राथमिकताओं के मुताबिक खर्च किया जाना चाहिए। साहेबगंज को कार्गो हब के रूप में विकसित करने और गंगा नदी पर अतिरिक्त पुल या बांध बनाने की मांग की। साथ ही डेडीकेटेड इंडस्ट्रियल माइनिंग कॉरिडोर विकसित करने पर भी जोर दिया।

केंद्र की योजनाओं के मानदंड में बदलाव की जरूरत
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार कई सामाजिक सुरक्षा योजनाएं चला रही है जैसे पेंशन योजना, मइयां सम्मान योजना और अबुआ स्वास्थ्य योजना। उन्होंने कहा कि केंद्र की योजनाओं जैसे आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना, मनरेगा आदि की राशि बढ़ाई जानी चाहिए और इन्हें राज्यों की जरूरतों के अनुसार लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने 38 लाख गरीब परिवारों को 15 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा देने का काम शुरू किया है और जिलावार हेल्थ प्रोफाइल तैयार कर रही है, जिसे पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए। CNT और SPT एक्ट की वजह से निवेश में आ रही बाधा को दूर करने के लिए वित्त मंत्रालय से समन्वय जरूरी है।

विशेष केंद्रीय सहायता जारी रखने की मांग
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के 16 जिले पहले नक्सल प्रभावित थे, जो अब सिर्फ दो जिलों तक सीमित हैं। इसके बावजूद, सभी 16 जिलों में विशेष केंद्रीय सहायता जारी रहनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि CAPF की प्रतिनियुक्ति से जुड़े खर्च राज्य सरकार उठा रही है, जिसे पूरी तरह खत्म किया जाना चाहिए।

प्रवासी मजदूरों के लिए केंद्र सरकार की भागीदारी जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड काल में राज्य के बाहर काम करने वाले मजदूरों को सरकार ने सहायता दी। हाल ही में कैमरून में फंसे मजदूरों को भी सरकार ने वापस बुलाया। उन्होंने कहा कि जो मजदूर विदेशों में काम करना चाहते हैं, उनके वीजा, सुरक्षा और खर्च में केंद्र सरकार की भागीदारी जरूरी है।

केंद्र-राज्य के बीच राजस्व बंटवारे पर उठाई बात
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व का वर्टिकल डिवीजन 41% से बढ़ाकर 50% किया जाना चाहिए। अभी केंद्र उपकर और अधिभार को घटाकर ही पूल बनाता है, जो राज्यों के हिस्से में नहीं आता।उन्होंने कहा कि GST लागू होने के बाद झारखंड जैसे विनिर्माण राज्य को घाटा हुआ है। जून 2022 के बाद से कंपनसेशन की राशि नहीं मिलने से राज्य को हजारों करोड़ की हानि हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि “Viksit Bharat @2047” की दिशा में झारखंड को पूरा सहयोग मिलना जरूरी है, तभी विकसित भारत की परिकल्पना पूरी हो सकती है।

इन अधिकारियों ने भी दी उपस्थिति
इस बैठक में झारखंड की ओर से मुख्य सचिव अलका तिवारी, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार, स्थानिक आयुक्त अरवा राजकमल और योजना सचिव मुकेश कुमार भी शामिल हुए।

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