सोनू सूद :पंजाब के अनाथ बच्चों की करेंगे मदद संवारेंगे भविष्य 4 बच्चों को लेंगे गोद

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जहरीली शराब पीने से मरने वाले 113 लोगों में शामिल था तरनतारन जिले के गांव मुरादपुर का रिक्शा चालक सुखेदव सिंह

पति की मौत का पता चलने के दो घंटे के भीतर पत्नी ज्योति ने भी तोड़ दिया था दम, रिश्तेदारों के पास रह रहे हैं चारों बच्चे

फाजिल्का के माता छाया आश्रम में होगी 13 वर्षीय करनबीर सिंह, 11 वर्षीय गुरप्रीत सिंह, नौ वर्षीय अर्शप्रीत सिंह और सात वर्षीय संदीप सिंह की परवरिश

छत्तीसगढ़ रिपोर्टर

कोरोना की माहामरी के खौफ के बीच जरूातमंद लोगों की मदद करके चर्चा में आए फिल्म अभिनेता सोनू सूद ने पंजाब में अनाथ हुए चार मासूम बच्‍चों को सहारा दिया है। ये वही बच्चे हैं, जिनके पिता की जहरीली शराब की वजह से मौत हो गई। इसके बाद सदमे के मारे मां की भी जान चली गई तो चारों अनाथ हो गए। अब इनकी जिंदगी संवारने के लिए सोनू सूद आगे आए हैं। वह इन चारों बच्‍चों को गोद लेंगे।

दरअसल, जहरीली शराब पीने से बीते सप्ताहभर में पंजाब के तीन जिलों तरनतारन, अमृतसर और गुरदासपुर में 113 लोगों की जान चली गई है। इन्हीं में तरनतारन जिले के गांव मुरादपुर का सुखेदव सिंह भी शामिल था। मिली जानकारी के अनुसार बीते गुरुवार को रिक्शा चालक सुखदेव सिंह की मौत का पता चला तो सदमे में दो घंटे बाद पत्‍नी ज्योति की भी मौत हो गई। हालांकि पंजाब सरकार की तरफ से मृतकों के परिवार को 5 लाख रुपए और नौकरी की घोषणा की है, लेकिन सुखदेव सिंह के परिवार में मासूम बच्चों को संभालने वाला कोई नहीं है। इनकी जिंदगी संवारने का बीड़ा बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद ने उठाया है।

सोनू सूद ने कहा कि वह इन बच्चों को गोद लेंगे। चारों बच्चों को फाजिल्का के माता छाया आश्रम में रखकर अच्छी परवरिश की जाएगी। बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा भी सोनू सूद खुद उठाएंगे। इस बारे में सोनू के दोस्त ईएचडी चेंबर्स ऑफ कॉमर्स के चेयरमैन करन गल्होत्रा ने बताया कि अनाथ हुए चार बच्चों (13 वर्षीय करनबीर सिंह, 11 वर्षीय गुरप्रीत सिंह, नौ वर्षीय अर्शप्रीत सिंह और सात वर्षीय संदीप सिंह) को एनजीओ चलाने वाले गगनदीप सिंह अपने घर ले गए थे। सुखदेव सिंह के भाई मनजीत सिंह और भाभी कमलजीत कौर ने बताया कि जिला बाल सुरक्षा अधिकारी राजेश कुमार के दखल से चारों बच्चों को वापस घर लाया गया। 3 अगस्त को प्रकाशित खबर पढ़कर सोनू सूद ने चारों बच्चों को गोद लेने का फैसला किया।

उधर, जिला बाल भलाई कमेटी के चेयरमैन डॉ. दिनेश गुप्ता ने कहा कि बच्चों को गोद लेने के लिए सेंटरलाइजेशन अडॉप्शन रिसोर्स एजेंसी (कारा) के माध्यम से ऑनलाइन अप्लाई किया जा सकता है। फिल्हाल चारों बच्चे अपने रिश्तेदारों के पास रह रहे हैं। इन बच्चों की काउंसिलिंग भी जरूरी है। इसके लिए बच्चों की देखभाल कर रहे रिश्तेदारों को कमेटी के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया है।

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