बड़ा खुलासा: मुल्ला बरादर के पासपोर्ट ने खोली तालिबान के लिए पाकिस्तानी समर्थन की पोल

Chhattisgarh Reporter
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छत्तीसगढ़ रिपोर्टर

काबुल 11 सितम्बर 2021। अफगानिस्तान में तालिबानी शासन कायम करने में पाकिस्तान का हाथ होने का बड़ा सबूत सामने आया है। जानकारी के मुताबिक देश में गठित नई सरकार में उपप्रधानमंत्री मुल्ला अब्दुल गनी बरादर का पाकिस्तानी पासपोर्ट और पहचान-पत्र सामने आया है। दोनों दस्तावेजों में उसका नाम मोहम्मद आरिफ आघा के रूप में अंकित किया गया है। इस पासपोर्ट के सामने आने के बाद से अब यह बिल्कुल स्पष्ट है कि अफगानिस्तान में तालिबान के संपूर्ण कब्जा करने के पीछे पाकिस्तानी आईएसआई का हाथ है। आईएसआई ने एम नज़ीर आगा के बेटे मुहम्मद आरिफ आगा के नाम पर बरादर का राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी किया था।

बता दें कि इसके पहले भी पाकिस्तान पर लंबे समय से अफगान रक्षा बलों के खिलाफ उनकी लड़ाई में तालिबान को सैन्य, आर्थिक और खुफिया सहायता प्रदान करने का आरोप लगाया जाता रहा है जिसे इस्लामाबाद ने बार-बार निराधार बताया है। लेकिन इस पासपोर्ट के सामने आने के बाद से पाक का काला चेहरा सामने आ गया है।

बरादर का पाकिस्तानी पासपोर्ट नंबर GF680121 है

सीरियल नंबर 42201-5292460-5 के साथ बरादर का आजीवन पहचान पत्र, 10 जुलाई 2014 को जारी किया गया था। बरादर की जन्म तिथि का उल्लेख वर्ष 1963 के रूप में किया गया है। राष्ट्रीय पहचान पत्र पर पाकिस्तान के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा विधिवत हस्ताक्षर किए गए थे। बरादर का पाकिस्तानी पासपोर्ट नंबर GF680121 है। पासपोर्ट और राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी करने की तारीख एक ही थी।

पाकिस्तान के क्वेटा में रहता था बरादर

काबुल पर नजर रखने वालों के अनुसार, मुल्ला उमर के साथ तालिबान के सह-संस्थापक मुल्ला बरादर पाकिस्तान के क्वेटा में रहता था और इस्लामी ताकत के नेतृत्व परिषद या शूरा का हिस्सा था। मुल्ला बरादर, जिन्हें मुहम्मद आरिफ आगा के नाम से भी जाना जाता है जो कि कतर के दोहा में तालिबान के राजनीतिक कार्यालय में वार्ता दल का नेतृत्व कर रहे थे।

तालिबान के कई नेता के पास हो सकता है पाकिस्तानी पासपोर्ट

हालांकि यह माना जाता है कि तालिबान के कई नेता पाकिस्तानी पासपोर्ट और पहचान पत्र रखते हैं, यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि तालिबान के प्रमुख हिबतुल्ला अखुंदजादा के पास पाकिस्तानी नागरिकता थी या नहीं। मुल्ला अखुंदजादा के काबुल में होने की ख़बरों के बावजूद, किसी ने उस छायादार मौलवी को नहीं देखा। अखुंदजादा कराची में पाकिस्तान छावनी में भारी सुरक्षा में रहते थे।     

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