कहा- शांति के लिए हो उपयोग, सियासी फायदे के लिए नहीं

छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
न्यूयॉर्क, 27 अक्टूबर 2026। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के पूर्ण सत्र में वीटो पावर के इस्तेमाल को लेकर भारत का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि वीटो का इस्तेमाल बेहद संयम के साथ किया जाना चाहिए, खासकर उन मामलों में जो अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने से जुड़े हैं।
पी. हरीश ने कहा, ”वीटो का अधिकार फिलहाल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों के पास है। भारत का हमेशा से मानना रहा है कि यह अधिकार एक जिम्मेदारी भी है और इसका इस्तेमाल सीमित राजनीतिक हितों को साधने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।”
‘331 बार इस्तेमाल हुआ वीटो’
भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि वीटो के इस्तेमाल का रिकॉर्ड स्पष्ट तस्वीर पेश करता है। संयुक्त राष्ट्र के अस्तित्व में आने के बाद से करीब 200 प्रस्तावों पर 331 बार वीटो का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों में से दो ने साढ़े तीन दशक से अधिक समय से वीटो का इस्तेमाल नहीं किया है। वहीं, वीटो के अधिकांश इस्तेमाल या इसकी धमकी केवल तीन स्थायी सदस्यों की ओर से आई है।
2022 की पहल से जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद थी
हरीश ने कहा, ”2022 में शुरू की गई वीटो पहल को बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया था। इसके तहत वीटो का इस्तेमाल किए जाने पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में बहस अनिवार्य की गई, ताकि संबंधित देशों की जवाबदेही तय हो सके।” हालांकि, उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव 76/262 को अपनाए जाने के बाद वीटो के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल का रिकॉर्ड इस पहल से जुड़ी उम्मीदों के विपरीत तस्वीर दिखाता है।
सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार की जरूरत
भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि वीटो का मुद्दा सुरक्षा परिषद में सुधार से जुड़े पांच प्रमुख विषयों में शामिल है, जिन पर अंतरसरकारी वार्ता यानी आईजीएन के तहत चर्चा होती है। उन्होंने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव 76/262 की भावना और बड़े पैमाने पर अत्याचार की घटनाओं से जुड़े प्रयासों का समर्थन करता है। लेकिन अब तक का अनुभव बताता है कि अलग-अलग मुद्दों पर छोटे-छोटे कदम उठाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने जोर दिया कि सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए व्यापक और प्रभावी प्रयास जरूरी हैं।


