अब ओलंपिक में जगह बनाने पर नजरें

छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
नई दिल्ली, 04 अक्टूबर 2026। अनाहत सिंह जानती थीं कि एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतना ‘बहुत यथार्थवादी’ लक्ष्य नहीं था लेकिन खिताब से सिर्फ एक जीत दूर रह जाना इस भारतीय स्क्वाश खिलाड़ी के लिए निराशा के साथ-साथ प्रेरणा का भी कारण बना और अब उनकी नजरें 2028 ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने पर है। अनाहत एशियाई खेलों की व्यक्तिगत स्क्वाश स्पर्धा के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं।
हालांकि उन्हें दुनिया की पांचवें नंबर की मलयेशियाई खिलाड़ी सिवसांगरी सुब्रमण्यम के खिलाफ हार के बाद रजत पदक से संतोष करना पड़ा। अगर अनाहत फाइनल जीत जातीं तो उन्हें 2028 ओलंपिक में सीधे जगह मिल जाती लेकिन यह 18 वर्षीय खिलाड़ी अब पीएसए रैंकिंग में ऊपर चढ़कर लॉस एंजिलिस ओलंपिक में अपनी जगह पक्की करने की कोशिश करेगी।
स्वदेश लौटने के बाद अनाहत ने कहा, ‘मैं निश्चित रूप से काफी निराश थी। दोबारा खुश होने या थोड़ा बेहतर महसूस करने में मुझे कुछ दिन लगे। फाइनल में हारना अच्छा नहीं लगता, विशेषकर तब जब आप किसी बड़े मुकाबले में जीत हासिल करने के बाद खिताब के इतने करीब पहुंच जाते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘मैं सकारात्मक पहलुओं को देखने की कोशिश करूंगी और इसे इस रूप में देखूंगी कि मुझे अभी बहुत कुछ सीखना है। अगर मैं शीर्ष खिलाड़ियों के खिलाफ इस तरह का प्रदर्शन कर सकती हूं तो इसमें मेरे लिए कई अच्छी बातें भी हैं।’ अनाहत एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के लक्ष्य के साथ उतरी थीं लेकिन उन्हें पता था कि मजबूत खिलाड़ियों की मौजूदगी को देखते हुए यह आसान लक्ष्य नहीं था। उन्होंने कहा, ‘मेरा पहला लक्ष्य एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक जीतना था। मुझे पता था कि यह बहुत यथार्थवादी लक्ष्य नहीं था लेकिन निश्चित रूप से मैं अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहती थी।’ उन्होंने कहा, ‘मेरे पास वैकल्पिक योजना भी होनी है जिसका मतलब रैंकिंग के जरिए क्वालीफाई करना है। अब मैं यही करने की कोशिश करूंगी। अगले 18 महीने में मैं अधिक से अधिक टूर्नामेंट खेलने और उनमें अच्छा प्रदर्शन करने पर ध्यान दूंगी, जिससे कि रैंकिंग में ऊपर जा सकूं और ओलंपिक में अपनी जगह पक्की कर सकूं।’
सीधे क्वालीफिकेशन का मौका हाथ से निकलने के बाद अनाहत ने अब अपना पूरा ध्यान पीएसए रैंकिंग पर लगा दिया है। अनाहत और अभय सिंह ने व्यक्तिगत स्पर्धाओं में रजत पदक जीते, जबकि भारतीय महिला और पुरुष टीम ने कांस्य पदक हासिल किए। भारतीय महिला स्क्वाश टीम की कोच सुरभि मिश्रा खिलाड़ियों के प्रदर्शन से खुश थीं लेकिन उनका मानना था कि टीम स्पर्धाओं में बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते थे। सुरभि ने कहा, ‘मैं खिलाड़ियों के प्रदर्शन से बहुत खुश हूं। अनाहत और अभय ने बहुत अच्छा किया। टीम स्पर्धा में थोड़ी निराशा है क्योंकि हम शायद थोड़ा बेहतर कर सकते थे। हम जीत से बस कुछ अंक दूर थे।’ कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय महिला टीम का हिस्सा रहीं तन्वी खन्ना ने कहा कि इस अभियान ने भारतीय स्क्वाश में हो रही प्रगति को दिखाया। उन्होंने कहा, ‘हमारा प्रदर्शन शानदार रहा। हमारे पास फाइनल में पहुंचने का मौका था, लेकिन इसके बावजूद टीम के रूप में हमने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया और दिखाया कि हम शीर्ष स्तर पर हैं। उम्मीद है कि अगली बार हम स्वर्ण पदक के साथ लौटेंगे।’


