सितंबर के पहले सप्ताह में दोबारा होंगी, अब तक 6 गिरफ्तार, प्राचार्य-मास्टरमाइंड बर्खास्त

छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
रायपुर, 24 अगस्त 2026। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) के पेपर लीक मामले में दुर्ग के भारती कॉलेज के असिस्टेंट लेक्चरर समेत 6 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। रायपुर के तेलीबांधा थाना क्षेत्र में सभी आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
वहीं, दुर्ग के भारती कॉलेज प्रबंधन ने भी मामले में कार्रवाई करते हुए लापरवाही बरतने के आरोप में प्राचार्य डॉ. एके दुबे को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। पेपर लीक के मास्टरमाइंड योगेश सोनकेसरिया को भी नौकरी से निकाल दिया गया है। पेपर लीक के बाद 7 अगस्त को हुई BSc कृषि प्रथम वर्ष की प्लांट पैथोलॉजी परीक्षा रद्द कर दी गई है। जांच में पता चला है कि गिरफ्तार आरोपियों ने यह प्रश्न पत्र भी लीक किया था। इससे पहले 20 अगस्त को BSc कृषि द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी परीक्षा रद्द की गई थी। अब दोनों परीक्षाएं सितंबर के पहले सप्ताह में दोबारा आयोजित की जाएंगी।
कई छात्र मिलकर पेपर खरीदने के लिए पैसे जुटाते थे
मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी के बाद कुछ छात्रों ने पेपर लीक को लेकर कई दावे किए हैं। एग्रीकल्चर विषय के कुछ छात्रों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि प्रश्नपत्र परीक्षा से कुछ घंटे पहले नहीं, बल्कि करीब एक दिन पहले ही छात्रों तक पहुंच जाता था।
छात्रों के मुताबिक, पेपर सुबह करीब 11 बजे तक उनके पास आ जाता था। दावा है कि यह मामला सिर्फ कीट विज्ञान के प्रश्नपत्र तक सीमित नहीं था। पूरे सेमेस्टर के कई विषयों के प्रश्नपत्र PDF के रूप में छात्रों के बीच शेयर किए जा रहे थे। एक पेपर की कीमत करीब 5 हजार रुपए तक बताई जाती थी।
दावा है कि कई छात्र मिलकर प्रश्नपत्र खरीदने के लिए पैसे जुटाते थे। हर छात्र अपनी क्षमता के मुताबिक 1-2 हजार रुपए देता था। सभी छात्रों से पैसे इकट्ठा होने के बाद प्रश्नपत्र की PDF खरीदी जाती थी और फिर उसे वॉट्सऐप के जरिए बाकी छात्रों के बीच भेज दिया जाता था। हालांकि, छात्रों के इन दावों की पुलिस जांच में अभी पुष्टि होना बाकी है।
1 हजार से 5 हजार तक में बिकता था पेपर
कुछ छात्रों ने बताया कि उन्हें भी दो-तीन पेपर खरीदने के ऑफर मिले थे, लेकिन उन्होंने पेपर नहीं खरीदा। छात्रों के मुताबिक, एक पेपर की कीमत 1 हजार से 5 हजार रुपए तक होती थी। कुछ प्रश्नपत्र पर्सनल फोन और मैसेज के जरिए भेजे जाते थे। थर्ड ईयर के पेपर के लिए भी छात्रों को उनके दोस्तों के जरिए कॉल किए जाते थे। इतना ही नहीं, कॉलेज के कुछ चुनिंदा और भरोसेमंद छात्रों से कहा जाता था कि वे पेपर लेकर आगे दूसरे छात्रों को बेचें और पैसे कमाएं।
परीक्षा से पहले ही छात्रों तक पहुंच जाते थे प्रश्नपत्र
बताया जा रहा है कि इस सत्र में करीब 10-11 विषयों की परीक्षाएं हो चुकी हैं। आरोप है कि इनमें से कई प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ही कुछ छात्रों तक पहुंच गए थे। कुछ प्रश्नपत्र बड़े स्तर पर फैल गए, उसके बाद विश्वविद्यालय ने परीक्षा रद्द की। फिलहाल, कार्रवाई उसी मामले में हुई है। हालांकि, छात्रों का दावा है कि इससे पहले हो चुकी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र भी परीक्षा से पहले ही कुछ छात्रों के पास पहुंच गए थे। एक अन्य छात्र के मुताबिक, परीक्षा के दौरान एक छात्र नकल की पर्ची के साथ पकड़ा गया था। उसके खिलाफ नकल का मामला बनाया जा रहा था। इसके बाद कथित तौर पर उस छात्र ने अगले दिन होने वाले प्रश्नपत्र की तस्वीर वायरल कर दी। तस्वीर के पीछे भारती कॉलेज की सीढ़ियां दिखाई दे रही थीं। इसके बाद कॉलेज से प्रश्नपत्र बाहर जाने का शक गहराया और मामले की जांच आगे बढ़ी।


