वीबी-जी राम जी: भ्रष्टाचार होगा खत्म, गांव बनेंगे विकास का इंजन

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छत्तीसगढ़ रिपोर्टर

नई दिल्ली 20 दिसंबर 2025। संसद से पारित विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड अजीविका मिशन (ग्रामीण) या वीबी-जी राम जी विधेयक कानून बनने के बाद गांवों को विकास का इंजन बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। पहले फाइलों में काम दिखता था, पर जमीन पर मजदूर भूखा सोता था। कहीं भ्रष्टाचार था, कहीं व्यवस्था की कमजोरी थी, कहीं समय पर भुगतान नहीं होता था। और यही हमारी पीड़ा रही है। पूज्य बापू ने भी कहा था कि असली भारत गांवों में बसता है। गांव को विकसित बनाए बिना विकसित भारत का संकल्प साकार नहीं हो सकता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गांवों को विकसित, आत्मनिर्भर, सशक्त और संपन्न बनाने के लिए कई योजनाएं जारी है और यह बिल इसी दिशा में ऐतिहासिक कदम है। पिछले कई दशकों से देश में कई सरकारें आईं और सबने ग्रामीण रोजगार की गारंटी देने के लिए कई प्रयास किए हैं। मनरेगा भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। लेकिन जमीनी हकीकत यह रही कि कागजों पर तो योजनाएं बहुत अच्छी लगती थीं, मगर गांवों में खेतों-खलिहानों में गरीब भाइयों-बहनों को वह हक नहीं मिल पाता था जिसका वादा किया गया था।

किसी तरह का पूर्वाग्रह नहीं रखा जाए
कुछ लोग पूछते हैं कि पुरानी व्यवस्था कमजोर तो नहीं हो जाएगी? गरीब मजदूरों के अधिकार छिन तो नहीं जाएंगे? ऐसी चिंताएं स्वाभाविक हैं और यही लोकतंत्र की ताकत है। इस नए विधेयक को खुले मन से, बिना किसी पूर्वाग्रह के पढ़ा और समझा जाना चाहिए।  मनरेगा में जो दिक्कतें थीं, जिनकी वजह से लोगों को उनका हक नहीं मिल पाता था, उन्हें हटा दिया गया है।

रोजगार सुरक्षा मिलेगी, हर काम पर होगी लोगों की नजर

  • धारा 5(1) कहती है इससे हर ग्रामीण परिवार को साल में 100 की बजाय अब 125 दिन के रोजगार की पक्की कानूनी गारंटी मिलेगी। अगर 15 दिन के अंदर काम नहीं मिला तो बेरोजगारी भत्ता मिलेगा।
  • धारा 4(2) और अनुसूची में चार मुख्य क्षेत्र पानी की सुरक्षा, बुनियादी ग्रामीण ढांचा, आजीविका से जुड़ा ढांचा, और प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के काम शामिल किए गए हैं। ऐसी अधोसंरचनाओं का निर्माण स्थायी विकास की अहम कड़ी साबित होगा।
  •  धारा 4(1) से 4(3) तक स्पष्ट करती है कि सारे काम गांव के स्तर पर तय होंगे, ग्राम सभा से मंजूरी लेनी होगी। ग्राम सभा ही तय करेगी कि उनके गांव में क्या काम होना चाहिए, किस चीज की जरूरत है। इसमें ऊपर से कोई केंद्रीकरण नहीं थोपा गया है बल्कि मिलकर काम करने का तरीका बनाया गया है।
  • पहले एक विभाग अपना काम करता था, दूसरा अपना काम और दोनों के मध्य कोई तालमेल नहीं था। अब सारे काम विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक में जोड़े जाएंगे, ताकि एक साथ मिलकर योजना बने, एक साथ काम हो, और पूरी व्यवस्था स्पष्ट दिखाई दे। इससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।
  • धारा 16, 17, 18 और 19 पंचायतों को, कार्यक्रम अधिकारियों को जिला प्राधिकारियों को योजना बनाने, लागू करने और निगरानी का अधिकार देती हैं।
  • धारा 20 ग्राम सभा की सामाजिक व्यवस्था को मजबूत करने वाली है, जिससे समुदाय की निगरानी और बढ़ती है। गांव के लोग खुद देखेंगे, जांचेंगे कि काम ठीक से हो रहा है या नहीं। तकनीक जवाबदेही को मजबूत आधार मिलेगा।

मजदूरों की नहीं होगी कमी
एक महत्वपूर्ण सवाल यह उठाया जा रहा है कि खेती के व्यस्त मौसम में अगर सारे मजदूर सरकारी कामों में लग गए तो फसल कौन काटेगा? विधेयक की धारा 6 में इसका जवाब दिया गया है। यह राज्यों को साल में कुल साठ दिनों तक काम रोकने का अधिकार देती है। उन्हें पहले से ही घोषित करना होगा कि इन दिनों इस योजना के तहत काम नहीं होगा। सबसे अच्छी बात यह है कि धारा 6 (3) के तहत जिला, ब्लॉक या ग्राम पंचायत स्तर पर अलग-अलग घोषणाएं की जा सकेंगी।

पारदर्शी ढंग से बांटा जाएगा बजट
बिल की धारा 4(5) और धारा 22(4) साफ कहती हैं कि राज्यों के लिए बजट तय होगा और इसे पारदर्शी मापदंडों के आधार पर बांटा जाएगा। कोई मनमानी और भेदभाव नहीं होगा। जिस राज्य को जितनी जरूरत होगी, जहां जितना काम होगा, वहां उतना पैसा जाएगा।

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