भारत में इस साल घातक रहा मानसून… बाढ़, बारिश और भूस्खलन की घटनाओं में 1500 से अधिक लोगों की मौत

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छत्तीसगढ़ रिपोर्टर

नई दिल्ली 01 अक्टूबर 2025। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने मंगलवार को कहा कि जून से सितंबर तक अत्यंत प्रतिकूल मौसम के चलते देश भर में कम से कम 1,528 लोगों की जान चली गई, जिनमें मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में शामिल हैं। आईएमडी ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए ये आंकड़े दिए। बाढ़ और भारी बारिश के कारण 935 लोगों की मौत हुई जबकि 570 लोगों की जान बिजली गिरने और आंधी-तूफान के चलते चली गई। लू के कारण 22 लोगों ने अपनी जान गंवाई। मध्यप्रदेश में सबसे अधिक 290 लोगों की मौत हुई, जिनमें बाढ़ और भारी बारिश से 153 तथा बिजली गिरने से 135 मौतें शामिल हैं। हिमाचल प्रदेश में 141 मौतें हुईं। इनमें लगभग सभी मौतें मूसलाधार बारिश के कारण अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन के कारण हुईं। जम्मू और कश्मीर में 139 मौतें हुईं, जिनमें से अधिकांश मौतें बारिश से संबंधित थीं। महाराष्ट्र में 135 मौतें हुईं, जिनमें से अधिकांश बाढ़ के कारण हुईं। बिहार में 62 मौतें हुईं, जो सभी बिजली गिरने से जुड़ी थीं। उत्तर प्रदेश भी बुरी तरह प्रभावित हुआ, जहां 201 लोगों की मौत हुई। इन 201 में से 112 की मौत बिजली गिरने से और 69 की भारी बारिश से हुई।

झारखंड में 129 मौतें हुईं, जिनमें से 95 मौतें बिजली गिरने से हुईं। गुजरात में 31, दिल्ली में तीन और ओडिशा में 36 मौतें हुईं। हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे हिमालयी राज्यों पर बाढ़ एवं भूस्खलन की सबसे अधिक मार पड़ी। बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश जैसे गंगा-तटीय राज्यों में बिजली गिरने से मौतों की संख्या अधिक देखी गई। इस मानसून सीजन में भारत में 937.2 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य 868.6 मिमी बारिश से आठ प्रतिशत अधिक है। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में 1,089.9 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य 1,367.3 मिमी बारिश से 20 प्रतिशत कम है।

बिहार, अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में मानसून के चार महीनों में से तीन महीनों में कम बारिश हुई। उत्तर-पश्चिम भारत में 747.9 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 27.3 प्रतिशत अधिक है। यह 2001 के बाद से सबसे अधिक और 1901 के बाद से छठी सबसे अधिक बारिश है। इस क्षेत्र के सभी जिलों में जून, अगस्त और सितंबर में सामान्य से अधिक बारिश हुई। पंजाब में दशकों में सबसे भीषण बाढ़ आई, जबकि हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में बादल फटने, अचानक बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं हुईं, जिससे बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा और लोग विस्थापित हुए। 

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