
छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
नई दिल्ली 18 मई 2025। सीजेआई जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि आज के दौर में एक जज मानवीय अनुभवों को नजरअंदाज कर कानूनी मामलों को सिर्फ स्याह सफेद शब्दों में देखने का जोखिम नहीं उठा सकता। उसे जमीनी हकीकत को अनदेखा नहीं करना चाहिए। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए सीजेआई ने सामाजिक वास्तविकताओं को समझने और उनका जवाब देने में जजों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। सीजेआई ने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा, मैं अपनी इच्छा से वकील नहीं बना, मेरी पहली पसंद आर्किटेक्ट बनना था। मैं लगातार इस बारे में सोचता रहा क्योंकि मैं बॉम्बे हाईकोर्ट लॉ की इंफ्रास्ट्रक्चर कमेटी और बिल्डिंग कमेटी का चेयरमैन था। उन्होंने इस करियर को आगे बढ़ाने में अपने पिता की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा, मेरे पिता स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद वकील बनना चाहते थे। वह चाहते थे कि उनका एक बेटा वकील बने और मैं बड़ा होने के नाते उनकी इच्छा का सम्मान करना चाहता था। इसलिए, मैंने कानून को चुना।
न्यायिक प्रणाली को सर्वश्रेष्ठ देने का किया प्रयास
सीजेआई ने बताया कि उनके पिता ने उनसे कहा था कि वकील के रूप में काम करना वित्तीय समृद्धि लाएगा, लेकिन एक सांविधानिक अदालत में जज के रूप में उन्हें डॉ. बी आर अंबेडकर के सामाजिक और आर्थिक न्याय के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाना होगा। सीजेआई ने कहा कि उन्होंने हमेशा न्यायिक प्रणाली को अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास किया है।
जजों को लोगों से जुड़ने में परहेज नहीं करना चाहिए
सीजेआई ने इस बात पर जोर दिया कि न्यायपालिका में लोगों के लिए अलगाव एक प्रभावी दृष्टिकोण नहीं है। उन्होंने इस धारणा को खारिज कर दिया कि सुप्रीम कोर्ट के जजों को लोगों से जुड़ने से बचना नहीं चाहिए।


