यांत्रिक बुद्धिमत्ता का उपयोग और चुनौतियां विषय पर हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी

छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
वर्धा 15 मई 2025। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने कहा कि यांत्रिक बुद्धिमत्ता का उपयोग मानवता के हक में होना चाहिए। हमें सजग और सचेत रहकर यांत्रिक बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल करना चाहिए। हमें इसे अवसर के रूप में देखने की आवश्यकता है। प्रो. कुमुद शर्मा डॉ. आंबेडकर कॉलेज ऑफ सोशल वर्क, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय का जनसंपर्क कार्यालय, महाराष्ट्र एसोशिएशन ऑफ सोशल वर्क एजुकेटर्स (मास्वे) एवं पब्लिक रिलेशन्स सोसाइटी ऑफ इंडिया (पीआरएसआई), वर्धा चैप्टर के संयुक्त तत्त्वावधान में बुधवार 14 मई को ‘यांत्रिक बुद्धिमत्ता का उपयोग और चुनौतियां’ विषय पर डॉ. आंबेडकर कॉलेज ऑफ सोशल वर्क, वर्धा में आयोजित संगोष्ठी के उद्घाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थी। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाराष्ट्र एसोशिएशन ऑफ सोशल वर्क एजुकेटर्स (मास्वे) के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. अंबादास मोहिते ने की। सावित्रीबाई फुले सभागार में आयोजित कार्यक्रम में सुबेदार रामजी आंबेडकर शिक्षा समिति की संचालक डॉ. चेतना सवाई, डॉ. आंबेडकर कॉलेज ऑफ सोशल वर्क के प्राचार्य डॉ. मिलींद सवाई मंच पर उपस्थित थे। कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने कहा कि भारत सरकार ने भारत को यांत्रिक बुद्धिमत्ता का हब बनाने का काम शुरू किया है। शिक्षा के क्षेत्र में इसका कैसे उपयोग किया जाए इस पर मंथन चल रहा है। भारत की भाषा का सूचना तकनीकी का बाजार बढ रहा है। नई प्रणाली आने से चिंता का बढना स्वाभाविक है, परंतु मानवीय नैतिक सरकारों को बचाते हुए हमें इस प्रणाली का स्वीकार करना ही होगा। हमें यांत्रिक बुद्धिमत्ता के साथ रहना ही होगा, यदि ऐसा नहीं करते तो हम बिछड जाएंगे। उन्होंने कहा कि मशीनों पर निर्भर होने से समय की बचत होती है, इस बचे हुए समय का उपयोग हमें समाज व देश सेवा के लिए करना चाहिए।
सुबेदार रामजी आंबेडकर शिक्षा समिति, वर्धा की संचालक डॉ. चेतना सवाई ने उद्घाटन भाषण में कहा कि यांत्रिक बुद्धिमत्ता हमारे जीवन में परिवर्तन लाने की दिक्षा में उपयोगी सिद्ध होनी चाहिए। लोगों को जागरूक बनाने के लिए विज्ञान और तकनीकी में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता है। अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. अंबादास मोहिते ने कहा कि यांत्रिक बुद्धिमत्ता का उपयोग सभी क्षेत्र में हो रहा है। यदि हम इसमें महारत और कौशल हासिल करते हैं तो रोजगार उपलब्ध होंगे। उन्होंने कहा कि तकनीकी की खाई को कम करने की जरूरत है। प्राचार्य मिलिंद सवाई ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखी। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विलास वाणी ने किया। कार्यक्रम का प्रारंभ दीपप्रज्ज्वलन एवं महात्मा गांधी व डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की फोटो पर माल्यार्पण से किया गया। उद्घाटन के बाद ‘मीडिया एवं जनसंपर्क में ए.आई. की उपयोगिता’ विषय महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी बी.एस. मिरगे ने, ‘शिक्षा क्षेत्र में ए.आई. की उपयोगिता’ विषय पर हिंदी विश्वविद्यालय के लेबोरेट्री इन इनफार्मेटिक्स फार द लिबरल आर्ट्स ‘लीला’ प्रभारी डॉ. अंजनी कुमार राय एवं हिंदी विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग के एसोशिएट प्रोफेसर डॉ. राजेश लेहकपुरे ने, ‘साइबर सुरक्षा और ए.आई.’ विषय पर हिंदी विश्वविद्यालय के मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी डॉ. गिरीश पाण्डेय एवं सॉफ्टवेअर एसोशिएट डॉ. हेमलता गोडबोले ने वक्तव्य दिए।
समापन समारोह के दौरान प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर हिंदी विवि के हिंदी अधिकारी राजेश यादव, आयोजन समिति के डॉ. विलास वाणी, प्रो. परमानंद उके, प्रो. आशीष कातोरे, डॉ. गणेश गाडेकर, समिति के सदस्य डॉ. एस.डी. भोईकर, डॉ. माधुरी झाडे, डॉ. एम.एन. कुबडे, डॉ. वी. विटनकर, डॉ. डी. एस. मगरदे, प्राध्यापक बी.एन. खेडकर, प्रशांत घुलक्षे, स्वप्नील चव्हाण, डी.पी. ताकसांडे सहित बड़ी संख्या में अध्यापक, विद्यार्थी उपस्थित रहे।


