कामर्शियल माइनिंग फैसले के विरोध में तीन दिवसीय कोयला उद्योग राष्ट्रीय हड़ताल जबरदस्त सफल, अब 18 अगस्त को कोल इंडिया एवं एसईसीएल के समस्त खदानों में 24 घंटे की होगी हड़ताल

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ट्रेड यूनियन और कार्यकर्ताओं ने साफ-साफ भारत सरकार को चेतावनी दी, देश के कोल ब्लॉक का आवंटन निजी कंपनियों को किया जाए यह मंजूर नहीं

18 अगस्त 2020 को कोल इंडिया एवं एसईसीएल के समस्त खदानों में 24 घंटे की हड़ताल

हड़ताल से एसईसीएल में 250 करोड़ से ज्यादा का नुकसान

जिनकी नौकरी 1 साल बची है वो मजदूर भी आखिरी पड़ाव तक डटे रहे

एसईसीएल एटक के महामंत्री हरिद्वार सिंह ने कोयला मजदूरों को बहुत-बहुत बधाई दी

छत्तीसगढ़ रिपोर्टर

बिलासपुर 4 जुलाई 2020 एटक एचएमएस बीएमएस इंटक एवं सीटू के साथ-साथ तमाम एसोसिएशन,संगठन, ने मिलकर 5 सूत्री मांगों के समर्थन में 2 से 4 जुलाई तक कोयला उद्योग में राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया था । इसी तारतम्य में तीसरे दिन भी 4 जुलाई को जबरदस्त एसईसीएल में हड़ताल हुआ। कोयला मजदूरों ने अलग अलग विचारधारा के बावजूद समस्त ट्रेड यूनियनों ने, ट्रेड यूनियन के कार्यकर्ताओं ने साफ-साफ भारत सरकार को चेतावनी दी है कि किसी भी हालत में इस देश के कोल ब्लॉक का आवंटन निजी कंपनियों को किया जाए यह मंजूर नहीं है । लेकिन नीचे से ऊपर तक भ्रष्टाचार में डूबी सरकार जनता के बातों को मजदूरों के हड़ताल को ,जनाक्रोश को गंभीरता से लेते नहीं दिखाई देती है ।

एटक के महामंत्री कामरेड हरिद्वार सिंह ने “छत्तीसगढ़ रिपोर्टर से कहा पांचो श्रमिक संगठनों एटक, एचएमएस, बीएमएस, इंटक एवं सीटू के कोल इंडिया के सर्वोच्च नेताओं की वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बैठक हुई। 18 अगस्त 2020 को ही कोल इंडिया एवं एसईसीएल के समस्त खदानों में 24 घंटे की हड़ताल की जाएगी। हम उसका इंतजार कर रहे हैं लेकिन इस हड़ताल में समस्त ट्रेड यूनियनों के नेतागण कार्यकर्ता एवं आम मजदूरों ने जो फौलादी एकता दिखाई है एस. के .एम. एस.एसईसीएल (एटक) के महामंत्री कामरेड हरिद्वार सिंह ने उन्हें दिल की गहराई से सलाम किया है । 3 दिनों के हड़ताल में ट्रेड यूनियन के नेताओं ने जिस मर्यादा का पालन किया है वह भी सराहनीय है। कोयला उद्योग मजदूरों की संपत्ति है किसी ने नुकसान नहीं किया और ना ही हिंसा या बल का प्रयोग किया । अलबत्ता कोयला प्रबंधन ने कहीं रात्रि पल्ली के मजदूरों को कैंटीन में बिस्तर लगा कर के चोरी से गेस्ट हाउस में रोक करके खाने पीने का इंतजाम करके प्राइवेट कंपनियों को चलाने के लिए चोरी चोरी ऑपरेटर को भेजवाने का और प्राइवेट ट्रांसपोर्टरों को धमका कर के और अवैधानिक तरीके से कोयला निकलवाने का और ओ .बी. निकलवाने का प्रयास किया। कई जगह प्रबंधन ने पुलिस बल का सहारा लेकर मजदूरों को डराने की कोशिश की। जो पूरी तरह से फेल हो गए जब उत्पादन और डिस्पैच नहीं हो सका तो फिर फर्जी रिपोर्ट का सहारा लेकर के और उत्पादन और कोयले के डिस्पैच को दिखाने का प्रयास किया जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है ।

कामरेड हरिद्वार सिंह ने प्रबंधन को चेतावनी दिया कि भविष्य में आंदोलन हो तो निश्चित रूप से मर्यादा का पालन किया जाना चाहिए मर्यादा पालन करने की जिम्मेदारी ट्रेड यूनियन और प्रबंधन दोनों के ऊपर है अन्यथा अगर ट्रेड यूनियन के नेता गण कोयला मजदूरों को ललकार दिए होते । हिंसा और बल प्रयोग करने की छूट देते तो कोई भी ताकत उनका मुकाबला नहीं कर पाती लेकिन हम सब ने सूझबूझ से परिचय देते हुए और कार्यकर्ताओं को नेताओं को आक्रोश में होने के बावजूद भी उन्हें समझा-बुझाकर के और किसी भी लक्ष्मण रेखा को पार करने की इजाजत नहीं दिया ।इसलिए प्रबंधन की जिम्मेदारी है की हड़ताल कोयला उद्योग को बचाने के लिए है।यह हड़ताल सार्वजनिक क्षेत्र को बचाने के लिए है। यह लड़ाई भारत के संपत्ति को बचाने के लिए है और मजदूरों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया है बहुत ही बधाई के पात्र हैं।

हरिद्वार सिंह ने कहा हम भारत सरकार से कहना चाहते हैं कि भारत सरकार 400 रूपए प्रति टन कोयले के उत्पादन पर टैक्स लेते हैं वही 14 रूपए प्रति टन राज्य सरकारों को रॉयल्टी जाता है। हम सीएसआर फंड में करोड़ों रुपया खर्च करते हैं ।सारे प्रकार के टैक्स जमा करते हैं। हमारे एक-एक कर्मचारी भारत सरकार को आयकर टैक्स देते हैं और इनसे पूरे समाज का तरक्की और विकास होता है ।लेकिन कोयले का ब्लॉक जब निजी कंपनियों को चला जाएगा तो समाज का तरक्की नहीं होगा बल्कि कंपनियों में काम करने वाले मजदूरों को आधी अधूरी तनख्वाह मिलेगी रहने का घर नहीं होगा न तो पढ़ने के लिए स्कूल बसों का और ना ही अस्पताल और देश के नामी-गिरामी अस्पतालों में रेफर होकर के इलाज कराने की सुविधा होगी ।आज हम सब लोग मिलकर के भी ठेका मजदूरों को एच पी सी वेज नहीं दिला पा रहे हैं 940 क्या है आज सैकड़ों अपाहिज बड़ी बीमारी से तड़प रहे हैं मजदूर अपने घरों में बिस्तर पर हैं । वे ड्यूटी नहीं कर पा रहे हैं उनका परिवार आर्थिक तंगी का शिकार है ।

अगर 9 .4 .0 के तहत मेडिकल अनफिट हो जाते तो उनके एक आश्रित को रोजगार लगता और समुचा परिवार खुशहाली की जिंदगी जीता लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है । एचपी सीवेज के तहत एक ठेका मजदूर को 914 रूपए रोज के हिसाब से रोज मिलना चाहिए उन मजदूरों को 250 रूपए 300 रूपए और कहीं 350 रूपए रोज दिया जाता है । आखिर यह 650 रूपये कौन खा जाता है। क्या अकेले ठेकेदार पचा जाता है क्या उन मजदूरों के शोषण में प्रबंधन का हाथ नहीं है। उन मजदूरों की गाढ़ी कमाई में ठेकेदार के साथ-साथ प्रबंधन के लोग भी शामिल नहीं है ।

कामरेड हरिद्वार सिंह ने कहा जब हम संगठित क्षेत्र के अंदर ठेका मजदूरों को तमाम प्रयासों के बावजूद हम न्याय नहीं दिलवा रहे हैं तो क्या निजी कंपनियों में जो शोषण के आधार पर मुनाफा कमाती हैं यह कभी ऐसे मजदूरों को उनका हक दिला पाएंगे। यह बहुत बड़ा दर्द है मजदूरों का और इसीलिए इस आंदोलन में नियमित मजदुरों के साथ-साथ ठेका मजदूर भी मुस्तैदी के साथ शामिल थे। जिन की नौकरी 1 साल बची है उन मजदूरों को प्रबंधन डराकर के प्रलोभन देकर के तुम्हारा पीएफ कम हो जाएगा तुम्हारा पेंशन कम हो जाएगा तमाम तरह से बरगलाने की कोशिश किया लेकिन कोई माना नहीं और उम्र के आखिरी पड़ाव में भी संघर्ष के रास्ते को अख्रतियार किया। पूरे देश में 3 दिनों में दो हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है संयुक्त मोर्चे के समस्त नेताओं को बार-बार धन्यवाद देते हैं कि भविष्य में भी ऐसी एकता को बनाए रखें अकेले एसईसीएल के अंदर 250 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है कहीं भी मजदूर काम पर नहीं गया फिर भी रिकॉर्ड बनाने के लिए अपने सी आर को ठीक रखने के लिए फर्जी रिपोर्टिंग कर उत्पादन और डिस्पैच दिखाया गया है ।जो ना तो मजदूरों के गले उतर रहा है और ना ही नेताओं के यह जांच का विषय है।

18 अगस्त 2020 को कोल इंडिया एवं एसईसीएल के समस्त खदानों में 24 घंटे की हड़ताल

कामरेड रमेंद्र कुमार , पूर्व सांसद एवं एटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष

हरिद्वार सिंह ने बताया आज 4 जुलाई 2020  को पांचो श्रमिक संगठनों एटक, एचएमएस, बीएमएस, इंटक एवं सीटू के कोल इंडिया के सर्वोच्च नेताओं की वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बैठक हुई। जिसमें डॉ बी.के.राय जी (बीएमएस), कामरेड रमेंद्र कुमार जी (एटक), नाथूलाल पांडे जी (एचएमएस), कामरेड डीडी रामानंदन जी (सीटू) एवं एस.क्यू.जामा जी (इंटक) ने भाग लिया। नेताओं ने सर्वसम्मति से तीन प्रस्ताव पारित किया-

(1) हड़ताल के दौरान जिन अधिकारियों ने अनैतिक तरीके से काम करके बाहरी ताकतों की मदद से खदान चलाने की कोशिश की उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
(2) जिन कंपनियों में ठेका मजदूरों को एचपीसी वेज का भुगतान नहीं हो रहा है, उस कंपनी के उच्च प्रबंधन एवं ठेकेदारों बीच अनैतिक गठजोड़ है जिसकी वजह से ठेका मजदूरों को उनका हक नहीं मिल रहा है इसकी उच्च स्तरीय जांच की जाए और किसी भी स्तर के अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्यवाही किया जाए।
(3) नेताओं ने यह भी फैसला किया है कि कोयला उद्योग में निवेश नहीं करने के लिए निजी कंपनियों से अपील की जाएगी कि वे कोल ब्लॉक खरीदने के लिए टेंडर ना भरें।

18 अगस्त 2020 को कोल ब्लॉक खरीदने के लिए टेंडर भरने की आखिरी तारीख सरकार ने निर्धारित की है इसीलिए पांचों श्रमिक संगठन ने मिलकर यह निर्णय लिया है कि 18 अगस्त 2020 को ही कोल इंडिया एवं एसईसीएल के समस्त खदानों में 24 घंटे की हड़ताल की जाएगी।

एटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद कामरेड रमेंद्र कुमार ने दूरभाष से एटक एसईसीएल के महामंत्री कामरेड हरिद्वार सिंह को विस्तार से इन सारी बातों की जानकारी दी और यह भी कहा कि पांचों श्रमिक संगठन मिलकर आंदोलन को जारी रखेंगे। साथ ही साथ 3 दिन कोल इंडिया, एसईसीएल सिंगरेनी एवं समस्त कंपनी में 2,3 व 4 जुलाई को शानदार हड़ताल करने के लिए कोयला मजदूरों को बधाई दिया गया। प्रबंधन को चेतावनी दी गई कि हड़ताल के दौरान बदले की भावना से किसी मजदूर या यूनियन के कार्यकर्ता के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई तो इसके गंभीर परिणाम होंगें।

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