औषधि और वन्य प्राणियों का भोजन होने बावजूद भी गुरूघासीदास राष्ट्रीय उद्यान में “छिन्द” का उन्मूलन क्यों !

Chhattisgarh Reporter
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साजिद खान

कोरिया (छत्तीसगढ़) 26 फरवरी 2021 (छत्तीसगढ़ रिपोर्टर)। एक तरफ शासन करोड़ रुपए बजट खर्च कर जिस कार्य को करवा चुका हो ठीक उसी कार्य का ग्रामीण विरोध करें तो समझ लिजिए कि थोपे जाने वाली योजना में किसके फायदे के लिए बजट खर्च किया गया। जंगलों के आसपास वर्षो से रहने वाले वन्य प्राणियों को समझने वाले ग्रामीणों के अनुसार ऐसे कार्य करने से वन्य प्राणियों के साथ पशु पक्षियों की जीवनशैली को नुकसान पहुंच सकता है।

उल्लेखनीय है कि गुरूघासी दास राष्ट्रीय उद्यान बैकुंठपुर अंतर्गत रामगढ़ पार्क परिक्षेत्र में वित्तीय वर्ष 2020-21 में लेन्टाना उन्मूलन का कार्य किया गया। जानकारी के अनुसार हेक्टयर दर हेक्टयर रकबे में लगभग एक करोड़ रूपए की राशि को खर्च कर लेन्टाना उन्मूलन का कार्य करना रहा। जिसमें छोटे-छोटे झाड़ी-झंकाड के साथ छिन्द किस्म प्रमुख थी। जिसे जंगली खजूर कहा जाता है का उन्मूलन किया गया। वन विभाग ने 2020-21 में प.स.वृत्त दक्षिण रामगढ़ के बीट उत्तर तुर्रीपानी के कक्ष क्रमांक P 99 में प्रस्तावित 100 हेक्टयर रकबे में छिन्द / लेन्टाना उन्मूलन का कार्य जीपीएस N 23’38’0.50″ E 082’25’48.4″ में किया गया। विभागीय जानकारी अनुसार पार्क परिक्षेत्र सोनहत में भी लगभग 50-60 लाख रुपए राशि से छिन्द उन्मूलन का कार्य किया गया।  

अब इसी छिन्द के हो चुके उन्मूलन को पार्क के करीब गांव में बसने वाले ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों ने भरतपुर-सोनहत की पूर्व विधायक के साथ कलेक्टर को सौंपे पत्र में कहा कि वन के अधिकारी कर्मचारी अपनी मर्जी से पार्क के अंदर ट्रैक्टर से जोताई का कार्य कर रहे हैं यह उचित नही है। जोताई में जमीन में उगने वाले घांस के साथ कितने कंदमूल नष्ट हो जा रहे हैं। उन पौधों में विशेष पौधा छिन्द है। वह छिन्द आज समाप्त किया जा रहा है। छिन्द हमारे और जानवरों के लिए बहोत उपयोगी बारहमासी हरा भरा रहने वाला खास है। छिन्द का उपयोग चटाई बनाने से लेकर घर बनाने तक के लिए किया जाता है। छिन्द की आड उलट में कितने जानवर छिप के रहते हैं। छिन्द का पत्ते-फल को वनभैंसा, नीलगाय, भालू, बंदर, साही तथा ग्रामीण पशु भी खाते हैं। छिन्द एक औषधि भी है। छिन्द को जंगली खजूर भी कहते हैं। छिन्द बहोत से पक्षियों का भी भोजन है। परिक्षेत्र रामगढ़ के ग्रामीणों द्वारा इसे और वनसंपदाओं को बचाने और नही कटवाने हेतू कलेक्टर से निवेदन किया गया।   

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