मंत्री प्रहलाद पटेल बोले- कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे

छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
भोपाल, 10 अक्टूबर 2026। मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण पर जबलपुर हाईकोर्ट के फैसले के बाद राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है। कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि यह संवैधानिक रूप से संवेदनशील मामला है और सरकार अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखेगी। उन्होंने 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण से जुड़े विवाद के लिए तत्कालीन कमलनाथ सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ की जल्दबाजी में अध्यादेश लाया गया, लेकिन उसे पर्याप्त संवैधानिक आधार नहीं दिया गया। पटेल ने कहा कि भाजपा हमेशा पिछड़े वर्ग के हितों के समर्थन में रही है। ओबीसी आरक्षण और पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिलाने जैसे विषयों पर पार्टी ने जिम्मेदारी के साथ काम किया है। उनके मुताबिक, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक भी बुलाई थी और सहमति के साथ अदालत में सरकार का पक्ष रखा गया था।
50 प्रतिशत आरक्षण सीमा का दिया हवाला
मंत्री ने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा पार करने के लिए ठोस आधार प्रस्तुत नहीं किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उस समय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा मिल चुका था, इसके बावजूद सरकार ने आयोग से सहमति लेने की जरूरत नहीं समझी। पटेल के अनुसार, हाईकोर्ट की टिप्पणियों से तत्कालीन सरकार के फैसले की प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं। उन्होंने कांग्रेस पर राजनीतिक लाभ के लिए अध्यादेश लाने और अब अपनी जिम्मेदारी से बचने का आरोप लगाया। पटेल ने कहा कि कांग्रेस को बताना चाहिए कि आरक्षण की कानूनी लड़ाई के दौरान संवैधानिक प्रावधानों और सीमाओं पर पर्याप्त चर्चा क्यों नहीं की गई।
पुरानी नियुक्तियों पर फैसले को बताया उचित
हाईकोर्ट के फैसले में वर्ष 2019 से 2022 के बीच हुई नियुक्तियों में कार्यरत लोगों को नौकरी से नहीं हटाने संबंधी व्यवस्था का जिक्र करते हुए पटेल ने इसे उचित बताया। उन्होंने कहा कि भविष्य में आरक्षण से जुड़ी चुनौतियों और समायोजन के सवालों पर राज्य सरकार आवश्यक कदम उठाएगी। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार इस फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाएगी। उनके मुताबिक, ओबीसी वर्ग के हितों से जुड़े इस संवेदनशील विषय पर सरकार आगे भी कानूनी प्रक्रिया के तहत अपनी लड़ाई जारी रखेगी।


