सीएम योगी के आश्वासन पर माने छात्र

छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
प्रयागराज, 23 सितंबर 2026। टीजीटी-पीजीटी परीक्षा पुरानी नियमावली से कराने की मांग को लेकर प्रतियोगी छात्रों का धरना 18 दिनों से चल रहा है। इसमें चार छात्र पांच सितंबर से आमरण अनशन पर बैठे हैं। मंगलवार को सीएम योगी ने प्रतियोगी छात्रों की मांगों को पूरा करने के लिए शिक्षा मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह एनसीईआरटी को पत्र लिखे। इस आश्वासन के बाद बुधवार को शिक्षा निदेशालय पहुंचे जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने अनशन पर बैठे आजमगढ़ के रोशन सरोज, बुलंदशहर के प्रवीण कुमार, आजमगढ़ की शिमला पटेल व प्रतापगढ़ की मीना देवी को जूस पिलाकर उनका अनशन खत्म कराया।
प्रतियोगी छात्रों के पक्ष में सीएम, शिक्षा मंत्री से बोले- एनसीटीई को लिखें पत्र
शिक्षा निदेशालय में प्रतियोगी छात्रों के आंदोलन का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया। लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने मंगलवार को कहा था कि प्रयागराज में कुछ युवा धरने पर बैठे हैं। शिक्षा मंत्री से हमने कहा है कि इसके लिए एनसीटीई (राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद) को पत्र लिखें और छात्रों के हित में निर्णय लें। ऐसी व्यवस्था बना दें ताकि एक समय के बाद छात्र उसमें शामिल हो सकें। जड़ता की शिकार व्यवस्था नौजवानों के हौसलों को रोकने का काम करती है। धरने पर बैठे प्रतियोगी छात्रों के बीच मुख्यमंत्री का यह बयान वायरल होता रहा। छात्रों ने साफ किया कि लिखित में इसके लिए जब तक कोई आदेश नहीं जारी हो जाता है तब वह आंदोलन नहीं खत्म करेंगे। टीजीटी-पीजीटी भर्ती प्रक्रिया पुरानी नियमावली से कराए जाने की मांग को लेकर सोमवार से आंदोलित छात्र धरनास्थल से शिक्षा निदेशालय पहुंच गए थे और अनशन वहीं पर जारी कर दिया। रात में भी बड़ी संख्या में छात्र निदेशालय कैंपस में डटे रहे।
मंगलवार से बढ़ने लगी थी संख्या
मंगलवार को सुबह से छात्रों की संख्या फिर बढ़ने लगी। इसके बाद पुलिस फोर्स के साथ पुलिस के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे थे। पुलिस ने मेन गेट पर बैरिकेडिंग करते हुए गेट को भी बंद कर दिया खा। अगुवाई कर रहे आशुतोष पांडेय समेत तमाम छात्र निदेशालय में उस स्थान पर जाना चाहते थे जहां पर पहले से ही छात्र धरने पर बैठे थे। पुलिस उन्हें अंदर जाने से रोकने का प्रयास की तो तीखी नोकझोंक भी हुई। अंत में गेट पर ही छात्र बैठ गए और नारेबाजी करने लगे।
निदेशालय में नहीं हुआ काम, निराश लौटे लोग
शिक्षा निदेशालय में प्रदेश भर से शिक्षक व शिक्षा विभाग के अधिकारी व कर्मचारी पहुंचते हैं। छात्रों के आंदोलन के चलते सुबह से ही पुलिस ने यहां बैरिकेडिंग कर दिए थे। सड़क से लेकर निदेशालय परिसर में सिर्फ पुलिस फोर्स व छात्र-छात्राएं ही मौजूद रहे। निदेशालय के लगभग सभी कार्यालयों में मंगलवार को दिन भर ताला लटकता रहा। दूसरे जनपदों से आने वाले लोग भी निराश होकर लौट गए।
सपा सांसद को डीसीपी ने रोका
मंगलवार को देर शाम कौशाम्बी से सपा सांसद पुष्पेंद्र सरोज शिक्षा निदेशालय पहुंचे थे। वह प्रतियोगी छात्रों के बीच में जाना चाहते थे लेकिन डीसीपी सिटी सागर जैन ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। उन्हाेंने सांसद का हाथ पकड़कर बाहर जाने को कहा तो सांसद बिफर गए। उन्होंने कहा, वह छात्रों की बात सुनने आए हैं, एक जनप्रतिनिधि को लोगों से मिलने के लिए रोका जा रहा है। बाद में गेट के बाहर ही धरने पर बैठे छात्रों से उन्होंने वार्ता की। उन्होंने कहा, मैं आपके मांगों के समर्थन में हूं। जंतर-मंतर पर भी गया था और आपके लिए खड़ा हूं।
अनशनकारियों का बिगड़ रहा स्वास्थ्य
पांच सितंबर से चार प्रतियोगी छात्रों ने अनशन शुरू किया था। इसमें आजमगढ़ के रोशन सरोज, बुलंदशहर के प्रवीण कुमार, आजमगढ़ की शिमला पटेल व प्रतापगढ़ की मीना देवी शामिल हैं। आंदोलन के बीच यह चारों लगातार लेटे हुए हैं। खाना छोड़ने की वजह से स्वास्थ्य बिगड़ गया था। वह सिर्फ पानी और नींबू पानी पीकर यह अनशन जारी रखे हुए थे। 15 सितंबर को तबीयत बिगड़ने पर चारों को तेज बहादुर सप्रू अस्पताल भी भर्ती कराया गया था, लेकिन बाद में यह फिर अनशन जारी रखते हुए धरने में शामिल हो गए थे।


