सऊदी अरब के दावे से हलचल

छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
मदीना, 15 सितंबर 2026। सऊदी अरब ने मदीना के जबल सईद क्षेत्र में करीब 11 करोड़ टन अयस्क संसाधन मिलने का दावा किया है, जिसमें भारी दुर्लभ मृदा तत्वों के साथ यूरेनियम की भी उत्साहजनक मात्रा बताई गई है। सोमवार को सामने आई मीडिया रिपोर्टों में सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान के हवाले से यह जानकारी दी गई। यह खोज सऊदी अरब की विजन 2030 के तहत ऊर्जा और खनिज संसाधनों में विविधता लाने की कोशिश तथा अमेरिका के साथ उसके नागरिक परमाणु सहयोग के बीच सामने आई है। क्षेत्रीय स्तर पर ईरान के साथ तनाव के बीच यह खोज सऊदी अरब के ऊर्जा और रणनीतिक महत्व को और बढ़ा सकती है।
मदीना में मिले 11 करोड़ टन अयस्क में यूरेनियम की मौजूदगी
सऊदी ऊर्जा मंत्री के मुताबिक, मदीना के जबल सईद परियोजना में किए गए खनन और भूगर्भीय अध्ययनों से करीब 11 करोड़ टन अयस्क के संसाधनों का अनुमान सामने आया है। इस अयस्क में दुर्लभ मृदा खनिजों, खासकर भारी तत्वों की मात्रा अधिक पाई गई है। इसके साथ ही इसमें यूरेनियम की भी उत्साहजनक मात्रा मौजूद होने के संकेत मिले हैं। अरब न्यूज ने प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान के हवाले से बताया कि जबल सईद परियोजना में हुई खोज और भूगर्भीय अध्ययन से इन संसाधनों का पता चला है। यूरेनियम की मौजूदगी वाला यह भंडार सऊदी अरब के लिए ऊर्जा और खनिज क्षेत्र में रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
इस्लाम के दो पवित्र शहरों में से एक है मदीना
यूरेनियम की खोज की यह घोषणा ऐसे समय हुई है, जब सऊदी अरब में क्षेत्रीय तनाव बढ़ा हुआ है। सऊदी अरब इस्लाम के दो सबसे पवित्र स्थलों—मक्का और मदीना—का घर है। इस्लामी इतिहास में मदीना का विशेष महत्व है। पैगंबर मुहम्मद ने 622 ईस्वी में मक्का से मदीना की हिजरत की थी और इसके बाद मदीना इस्लाम के शुरुआती और महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित हुआ।
ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब पर नजर
सऊदी अरब पर ईरान की ओर से उसके यहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने होने को लेकर निशाना साधे जाने की स्थिति रही है। दूसरी ओर, यमन में सक्रिय और फिर से मजबूत हो रहे हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊदी अरब की समुद्री पहुंच के लिए भी चुनौती पैदा की है। मध्य पूर्व में जारी युद्ध की पृष्ठभूमि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद से जुड़ी है। अमेरिका और इजरायल का आरोप रहा है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में है। वहीं, तेहरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण और नागरिक उद्देश्यों के लिए है।
सुन्नी सऊदी अरब और शिया ईरान के बीच शक्ति संतुलन
सऊदी अरब को मध्य पूर्व में सुन्नी शक्ति का प्रमुख केंद्र माना जाता है, जबकि ईरान शिया शक्ति का बड़ा केंद्र है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से क्षेत्रीय प्रभाव और रणनीतिक वर्चस्व को लेकर प्रतिस्पर्धा रही है। ऐसे में सऊदी अरब के लिए अपने ऊर्जा और खनिज संसाधनों को मजबूत करना आर्थिक ही नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
ऊर्जा संसाधनों में विविधता लाने की कोशिश
सऊदी अरब दुनिया की सबसे बड़ी अरब अर्थव्यवस्था है और पिछले कुछ वर्षों में उसने अपनी अर्थव्यवस्था को पारंपरिक तेल क्षेत्र पर निर्भरता से बाहर निकालने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। किंगडम ऊर्जा और खनिज संसाधनों में विविधता लाने के साथ-साथ घरेलू स्तर पर यूरेनियम के निष्कर्षण और नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को भी आगे बढ़ा रहा है। यह प्रयास सऊदी अरब की महत्वाकांक्षी ‘विजन 2030’ योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था और ऊर्जा क्षेत्र में विविधता लाना तथा तेल पर निर्भरता कम करना है।
अमेरिका के साथ परमाणु समझौते के बाद खोज का महत्व बढ़ा
प्राकृतिक अयस्क में यूरेनियम की मौजूदगी की यह खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे पहले अमेरिका और सऊदी अरब के बीच नागरिक परमाणु कार्यक्रम विकसित करने को लेकर समझौता हुआ था। दोनों देशों ने जुलाई में इस समझौते के साथ एक द्विपक्षीय सुरक्षा समझौते पर भी हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते को एक ऐसे ‘दशकों लंबे, अरबों डॉलर के साझेदारी कार्यक्रम’ की नींव के रूप में देखा गया, जिसके तहत अमेरिकी कंपनियां सऊदी अरब के नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के विकास में मदद करेंगी।
सऊदी अरब को अपने यहां यूरेनियम संवर्धन का विकल्प
समझौते का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसके तहत सऊदी अरब को अपनी जमीन पर यूरेनियम संवर्धन करने का विकल्प भी मिलेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रक्रिया के लिए अमेरिकी निगरानी की बाध्यता नहीं होगी। ऐसे में मदीना क्षेत्र में यूरेनियम युक्त अयस्क के बड़े संसाधनों का सामने आना सऊदी अरब की परमाणु ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं के संदर्भ में खासा महत्वपूर्ण हो सकता है। साथ ही, दुर्लभ मृदा तत्वों की मौजूदगी सऊदी अरब के लिए खनिज क्षेत्र में भी नई संभावनाओं के दरवाजे खोल सकती है।


