किसानों की मन की बात सुने मोदी सरकारः धनंजय सिंह ठाकुर

Chhattisgarh Reporter
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भाजपा अडानी-अंबानी के पैसों से चुनाव जीती कर्ज देशवासी चुका रहें

छत्तीसगढ़ रिपोर्टर          

रायपुर 19 दिसंबर 2020। नए कृषि बिल के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों की मांगों का समर्थन करते हुए प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि मोदी सरकार के हठधर्मिता मनमानी के चलते आज देशभर के अन्नदाता दिल्ली में आंदोलन कर रहे है। सरकार में बैठे लोग किसानों की मन की बात सुनने के बजाय अपनी हांक रहे है, आंदोलनरत किसानों के खिलाफ उलजुलूल आरोप लगा रहे है, विपक्षी दलों पर किसानों को भ्रमित करने बरगलाने का आरोप लगा रहे है। नए कृषि कानून से किसानों एवं आमजनता भला होने वाला नही है। नए कृषि कानून को लेकर कई अर्थशास्त्रियों ने कृषि विशेषज्ञों ने अपनी राय स्पष्ट कर दी है कि नये कृषि बिल से आने वाले दिनों में किसानों की माली हालत खराब होगी, दैनिक उपयोग में आने वाली खाद्यान्न की ब्लैक मॉर्केटिंग शुरू हो जायेगी महँगाई बढ़ेगी। खेती किसानी प्रभावित होगा रोजगार की गम्भीर संकट उत्तपन्न होगा। अर्थव्यवस्था जो अभी आक्सीजन में है वो मृत प्राय स्थिति में पहुंच जाएगी। नये कृषि बिल के खिलाफ किसानों के पक्ष में पूरा देश खड़ा हुआ है और इस बिल को वापस लेने की मांग कर रहा है।

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि मोदी भाजपा अडानी-अंबानी के पैसों से लोकसभा चुनाव जीती जिसका कर्ज देशवासियों को चुकाना पड़ रहा है। मोदी सरकार पहले ही रेल्वे स्टेशन, एयरपोर्ट, नवरत्न कंपनियां, 135 कंपनियों को पूंजीपतियों को सौप रहे है, अब कृषि बिल में संशोधन कर किसानों, मजदूरों, आमजनता को पूंजीपतियों का गुलाम बनाने का साजिश षड़यंत्र रच रही है। मोदी भाजपा की ऐसी क्या मजबूरी है जो इस बिल को वापस नही लेना चाहते? जबकि जिनके लिए बिल लाया गया है वही इस बिल का विरोध कर रहे। किसानों के साथ मोदी सरकार के मंत्रियों की कई बैठक हो गई है लेकिन सरकार के नुमाइंदे कृषि बिल के फायदे गिनाने में असफल हो गए है। भाजपा के नेता नए कृषि बिल को लेकर किसानों को गुमराह करना, झूठ बोलना बंद करे। किसानों की मांगों को समझते हुए तत्काल इस बिल को वापस लेना चाहिए लेकिन जिस प्रकार से भाजपा के नेता किसान आंदोलन को राष्ट्र विरोधी बताने आंदोलन में शामिल लोगों पर नक्सली, माओवादी, खालिस्तानी समर्थंक और अनेक प्रकार के आरोप लगा रहे हैं इससे स्पष्ट हो जाता है कि कृषि बिल में कुछ काला नहीं बल्कि पूरी दाल ही काली है।

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