घर में केयरटेकर रखने से पहले कराना होगा पुलिस वेरिफिकेशन

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छत्तीसगढ़ रिपोर्टर          

भोपाल, 06 नवंबर 2026।  घर में बुजुर्ग, बीमार या अकेले रहने वाले लोगों की देखभाल के लिए केयरटेकर, नर्सिंग अटेंडेंट या घरेलू सहायक रखना अब पहले जितना आसान नहीं होगा। इन्हें उपलब्ध कराने वाली निजी एजेंसियों को हर कर्मचारी का पुलिस वेरिफिकेशन कराना होगा। साथ ही कर्मचारी का नाम, फोटो और पहचान संबंधी जानकारी पहले ही मरीज या उसके परिजनों को देनी होगी। कर्मचारी बदलने पर भी एजेंसी को परिजनों को इसकी जानकारी देना अनिवार्य होगा। शहर में बढ़ती आपराधिक घटनाओं और घरों में काम करने वाले कर्मचारियों की पहचान को लेकर सुरक्षा चिंताओं के बीच भोपाल पुलिस कमिश्नरेट ने यह सख्ती की है। पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत आदेश जारी किया है। यह आदेश अगले दो महीने तक प्रभावी रहेगा। इसका उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

दरअसल, घरों में उपचार करा रहे मरीजों, बुजुर्गों, दिव्यांगों, बच्चों और अकेले रहने वाले लोगों की देखभाल के लिए निजी एजेंसियों के माध्यम से कर्मचारी रखे जाते हैं। ये कर्मचारी घर के भीतर तक पहुंच रखते हैं। कई बार उन्हें घर के सामान, कीमती वस्तुओं और बैंकिंग से जुड़ी जानकारियों तक पहुंच मिल जाती है। ऐसे में कर्मचारी का सत्यापन नहीं होना या एजेंसी के पास उसका रिकॉर्ड नहीं होना गंभीर सुरक्षा खतरा बन सकता है। पुलिस के आदेश में चोरी, धोखाधड़ी, मारपीट, अवैध वसूली, यौन अपराध और बुजुर्गों के शोषण जैसी घटनाओं की आशंका को देखते हुए एजेंसियों की जवाबदेही तय की गई है।

कर्मचारी बदलने से पहले देनी होगी सूचना
अब कोई एजेंसी मरीज के घर कर्मचारी भेजने से पहले उसका नाम, फोटो, सेवा का प्रकार, आने का संभावित समय और संपर्क नंबर मरीज या उसके अधिकृत परिजन को उपलब्ध कराएगी। यदि किसी कर्मचारी की छुट्टी, अनुपस्थिति या अन्य कारण से उसकी जगह दूसरा कर्मचारी भेजा जाता है, तो इसकी जानकारी पहले देनी होगी। नए कर्मचारी की पहचान, फोटो और पुलिस सत्यापन की स्थिति भी बतानी होगी। प्रतिस्थापित कर्मचारी का भी नए सिरे से निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सत्यापन कराना होगा। 

दूसरे जिले और प्रदेश के कर्मचारियों की भी होगी जांच
एजेंसियों को प्रत्येक कर्मचारी का पूरा नाम, जन्मतिथि, वर्तमान और स्थायी पता, मोबाइल नंबर, पहचान संबंधी दस्तावेज और हाल का फोटो संबंधित थाने में उपलब्ध कराना होगा। दूसरे जिले या राज्य के कर्मचारियों के पते की पुष्टि के लिए भी जरूरी कार्रवाई करनी होगी। पूर्व रोजगार और काम के अनुभव की जांच भी आवश्यकता के अनुसार की जा सकेगी। 

एजेंसियों को रखना होगा पूरा हिसाब
पुलिस ने केवल कर्मचारियों के सत्यापन तक ही जिम्मेदारी सीमित नहीं रखी है। एजेंसियों को अपने कार्यालय का पूरा पता, अधिकृत फोन नंबर, ई-मेल और शिकायत अधिकारी का विवरण सार्वजनिक करना होगा। संस्था का पंजीयन या लाइसेंस भी कार्यालय में प्रदर्शित करना होगा। हर कर्मचारी का अलग रिकॉर्ड रखना होगा। इसमें नियुक्ति की तारीख, सेवा का प्रकार, वर्तमान कार्यस्थल, सेवा समाप्ति और कर्मचारी से जुड़ी दूसरी जानकारियां शामिल होंगी। मरीज के घर किस कर्मचारी को कब भेजा गया, वह कब पहुंचा और कब वापस गया, इसका भी रिकॉर्ड रखना होगा। यदि कोई एजेंसी दूसरी एजेंसी या ठेकेदार के माध्यम से कर्मचारी उपलब्ध कराती है, तो उसकी जिम्मेदारी भी स्पष्ट करनी होगी। कर्मचारी को मरीज के घर किसी अनधिकृत व्यक्ति को साथ ले जाने की अनुमति नहीं होगी। ऐसा करना जरूरी होने पर मरीज या परिजन की पूर्व अनुमति और संबंधित व्यक्ति का रिकॉर्ड रखना होगा। 

चोरी या संदिग्ध मौत की जानकारी छिपाई तो एजेंसी पर भी कार्रवाई
आदेश में एजेंसियों को घटनाओं की जानकारी पुलिस से साझा करने के लिए भी बाध्य किया गया है। किसी मरीज के घर चोरी, धोखाधड़ी, जबरन वसूली, मारपीट, संदिग्ध मौत, गुमशुदगी या यौन अपराध जैसी घटना की जानकारी मिलती है तो तत्काल संबंधित थाने या आपातकालीन पुलिस सेवा को सूचना देनी होगी। एजेंसी व्यावसायिक प्रतिष्ठा बचाने के लिए किसी घटना को छिपा नहीं सकेगी। आपराधिक प्रकृति की शिकायत को केवल आंतरिक मामला बताकर बंद करने की भी अनुमति नहीं होगी। कर्मचारियों को मरीजों की निजता, सम्मान और सुरक्षा के साथ व्यवहार करने का प्रशिक्षण देना भी जरूरी होगा।

मरीज के बैंकिंग और निजी मामलों में भी रखनी होगी सावधानी
पुलिस ने आदेश में मरीजों की वित्तीय और निजी जानकारी की सुरक्षा पर भी जोर दिया है। केयरटेकर या सहायक मरीज की स्पष्ट अनुमति अथवा विधिसम्मत अधिकृत प्रतिनिधि की सहमति के बिना उसके वित्तीय कामकाज में दखल नहीं दे सकेगा। मरीज और उसके परिवार की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी, घरेलू परिस्थितियों या निजी जीवन की तस्वीरें और जानकारियां सोशल मीडिया पर साझा करने पर भी रोक रहेगी। इसके अलावा एजेंसियों को कर्मचारियों के आचरण की निगरानी, शिकायतों की जांच और नियमित समीक्षा के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त करना होगा। किसी भी तरह की अनियमितता या सुरक्षा संबंधी घटना सामने आने पर पुलिस को तत्काल सूचना देनी होगी।

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