धान खरीदी के ऐन पहले राजस्व व्यवस्था ठप, किसानों का पंजीयन अधर में
सरकार की लापरवाही का खामियाजा भुगतेंगे अन्नदाता

छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
रायपुर, 06 नवंबर 2026। प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि भाजपा सरकार की प्रशासनिक विफलता का खामियाजा एक बार फिर प्रदेश के किसानों को भुगतना पड़ रहा है। पटवारियों की हड़ताल से प्रदेश की राजस्व व्यवस्था लगभग ठप हो गई है, लेकिन सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है। धान खरीदी सिर पर है, पंजीयन की समय-सीमा समाप्त हो चुकी है या अंतिम चरण में है, किसान अपने राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्त कराने के लिए तहसील कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं और सरकार को किसानों की परेशानी दिखाई नहीं दे रही। भाजपा सरकार की किसान विरोधी नीतियों और प्रशासनिक नाकामी ने किसानों को संकट में डाल दिया है
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि धान खरीदी के पहले किसानों का पंजीयन, फौती, नामांतरण, बंटवारा और राजस्व रिकॉर्ड में त्रुटि सुधार बेहद जरूरी है। पटवारियों की हड़ताल के कारण ये सभी काम प्रभावित हो रहे हैं। जिन किसानों के परिवार में मुखिया का निधन हुआ है, उनके नाम पर फौती दर्ज नहीं हो पा रही है। जमीन के रिकॉर्ड में त्रुटियां दूर नहीं हो रही हैं। नामांतरण और बंटवारे के प्रकरण लंबित पड़े हैं। ऐसे में किसान अपनी ही जमीन का धान बेचने के लिए पात्रता और दस्तावेजों की समस्या से जूझ रहे हैं। सरकार बताए कि यदि किसान का रिकॉर्ड ही दुरुस्त नहीं होगा तो वह धान का पंजीयन और बिक्री कैसे करेगा सरकार की संवेदनहीनता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पटवारी संघ लगातार अपनी समस्याओं से शासन को अवगत करा रहा था, लेकिन सरकार ने समय रहते समाधान निकालने की कोई गंभीर पहल नहीं की। अब जब धान खरीदी का महत्वपूर्ण समय आ गया है, तब सरकार की नींद नहीं खुल रही है। सरकार की जिद और संवादहीनता के कारण किसान, पटवारी और पूरा राजस्व प्रशासन आमने-सामने खड़ा है। सवाल यह है कि किसानों की समस्याओं का समाधान करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि पटवारियों द्वारा नए पीवी ऐप यानी फिजिकल वेरिफिकेशन ऐप को लेकर उठाई जा रही तकनीकी और व्यावहारिक समस्याओं को भी सरकार ने नजरअंदाज किया। सर्वर डाउन होना, जीपीएस लोकेशन का मैच नहीं होना, बार-बार तकनीकी दिक्कतें आना और खेतों में खड़ी फसल का भौतिक सत्यापन करने में व्यावहारिक परेशानियां होना, ये सभी गंभीर मुद्दे हैं। डिजिटल व्यवस्था के नाम पर कर्मचारियों पर अव्यावहारिक नियम थोपना और उनकी समस्याओं की अनदेखी करना सुशासन नहीं, बल्कि प्रशासनिक तानाशाही है।
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि भाजपा सरकार किसानों को धान खरीदी में बड़ी-बड़ी गारंटियां और वादे तो दिखाती है, लेकिन जब किसानों को सरकारी रिकॉर्ड दुरुस्त कराने और पंजीयन की जरूरत होती है, तब पूरी व्यवस्था चरमरा जाती है। सरकार को बताना चाहिए कि पटवारियों की हड़ताल के कारण जिन किसानों का पंजीयन नहीं हो पाया या जिनके राजस्व प्रकरण लंबित हैं, उनकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या सरकार ऐसे किसानों को धान बेचने से वंचित होने देगी? क्या किसानों को सरकारी लापरवाही की सजा भुगतनी पड़ेगी?


