सुरक्षा परिषद में अस्थायी सीट के लिए भारत की दावेदारी

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छत्तीसगढ़ रिपोर्टर          

संयुक्त राष्ट्र, 30 अक्टूबर 2026। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत हरीश पर्वथनेनी ने 2028-29 के कार्यकाल को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में अस्थायी सीट की अपनी उम्मीदवारी के दौरान, भारत के लिए समुद्री सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मुख्य प्राथमिकताएं होंगी। उन्होंने कहा कि तकनीक से साझा समुद्री क्षेत्रों को सुरक्षित बनाया जाना चाहिए, न कि उन्हें और अधिक विवादित। पर्वथनेनी ने कहा, ‘महासागर वैश्विक व्यापार की धमनियां हैं, जो अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ते हैं, आजीविका का आधार बनते हैं और खाद्य व ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। अंतरराष्ट्रीय शांति और समृद्धि के लिए इनकी सुरक्षा बहुत जरूरी है।’

भारत की उम्मीदवारी पर क्या बोले राजदूत हरीश पर्वथनेनी?
सुरक्षा परिषद में ‘उभरती तकनीकें और समुद्री सुरक्षा: शांति और सुरक्षा पर प्रभाव’ विषय पर आयोजित उच्च-स्तरीय खुली बहस में बोलते हुए, भारत ने 2028-2029 के लिए सुरक्षा परिषद की अपनी उम्मीदवारी के संदर्भ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और समुद्री सुरक्षा को महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं के रूप में रेखांकित किया। पर्वथनेनी ने कहा कि उभरती तकनीकें समुद्री क्षेत्र को पूरी तरह से बदल रही हैं। उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वायत्त प्रणालियां, उपग्रह-आधारित निगरानी और उन्नत साइबर क्षमताएं समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के अभूतपूर्व अवसर प्रदान करती हैं। साथ ही, इनका गलत इस्तेमाल नई चुनौतियां भी पैदा करता है, जिन पर हमें सामूहिक रूप से ध्यान देने की जरूरत है।

क्या है भारत का उद्देश्य?
उन्होंने कहा, ‘हमारा उद्देश्य स्पष्ट है, तकनीक को मानवीय सुरक्षा को मजबूत करना चाहिए, न कि उसे कमजोर करना; इससे अवसरों का विस्तार करना चाहिए, न कि असमानता को बढ़ाना और इसे हमारे साझा समुद्री क्षेत्रों को सुरक्षित बनाना चाहिए, न कि विवादों का केंद्र। भारत इस उद्देश्य को हासिल करने के लिए सभी साझेदारों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है।’

 अस्थायी सीट के लिए भारत की प्रतिस्पर्धा किससे?
बता दें कि नई दिल्ली ने 2028-29 के कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद में अस्थायी सीट के लिए अपनी उम्मीदवारी की घोषणा की है। इसके लिए चुनाव अगले साल जून में होंगे, जिसमें भारत और ताजिकिस्तान ‘एशिया-प्रशांत समूह’ श्रेणी की एकमात्र सीट के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगे। पर्वथनेनी ने समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता और समुद्री व्यापार की सुरक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हाल ही में व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमलों से पता चलता है कि महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में रुकावट आने पर, इसके परिणाम उस इलाके से कहीं दूर तक महसूस किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि ये हमले नाविकों के लिए खतरा पैदा करते हैं, सप्लाई चेन को बाधित करते हैं, और विकासशील देशों पर अधिक लागत तथा आर्थिक अनिश्चितता के रूप में बहुत बुरा असर डालते हैं। उन्होंने व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमलों की भारत की ओर से कड़ी निंदा दोहराई।

  

 

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