आयुष विभाग ने किया समझौता

छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
शिमला, 13 अक्टूबर 2026। हिमाचल प्रदेश के किसान अब अपनी औषधीय जड़ी-बूटियां सीधे कंपनियों को बेच सकेंगे। इसके लिए आयुष विभाग ने किसानों और कंपनियों के बीच तीन पक्षीय समझौता किया है। इस व्यवस्था के तहत विभाग मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा और किसानों तथा कंपनियों के बीच समन्वय स्थापित करेगा। इससे किसानों को अपने उत्पाद बेचने के लिए बाजार तलाशने में आसानी होगी और बिक्री में होने वाली देरी से भी राहत मिलने की उम्मीद है।
अब तक जड़ी-बूटियों की बिक्री में देरी होने के कारण किसानों को कई बार अपने उत्पादों के उचित दाम मिलने में परेशानी होती थी। नई व्यवस्था के तहत किसानों को सीधे कंपनियों से जोड़ने का प्रयास किया गया है। इससे औषधीय पौधों की खेती करने वाले किसानों को बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी।
किसानों और कंपनियों के बीच आयुष विभाग बनेगा कड़ी
आयुष विभाग इस व्यवस्था में किसानों और कंपनियों के बीच मध्यस्थता करेगा। विभाग की ओर से कंपनियों को सूचीबद्ध किया गया है, जिन्होंने किसानों के साथ उत्पादों की आपूर्ति के लिए समझौते किए हैं। आयुष निदेशक रोहित जमवाल ने बताया कि विभाग ने तीन पक्षीय समझौता किया है। इसके तहत विभाग मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा और किसान अपनी जड़ी-बूटियां सीधे कंपनियों को बेच सकेंगे। उन्होंने बताया कि कंपनियों को सूचीबद्ध किया गया है और उन्होंने किसानों के साथ करार भी किए हैं।
बिक्री में देरी से मिलेगी राहत
जड़ी-बूटियों की बिक्री के लिए किसानों को बाजार उपलब्ध होने से उत्पादों की आपूर्ति आसान हो सकती है। किसानों को खरीदार तलाशने और बिक्री में देरी के कारण होने वाली परेशानियों से राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही, कंपनियों को भी अपनी जरूरत के अनुसार औषधीय पौधों का कच्चा माल सीधे किसानों से मिल सकेगा। सीधी खरीद से उत्पादों की गुणवत्ता और शुद्धता के बारे में जानकारी हासिल करना भी आसान हो सकता है। हालांकि, किसानों को मिलने वाले वास्तविक दाम और इस व्यवस्था से होने वाले लाभ का आकलन इसके क्रियान्वयन के बाद ही स्पष्ट होगा।
हिमाचल में औषधीय जड़ी-बूटियों की अपार संभावनाएं
हिमाचल प्रदेश की विविध जलवायु और प्राकृतिक वन संपदा इसे औषधीय पौधों के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाती है। प्रदेश के जंगलों और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कुटकी, जटामांसी, चिरायता, अतीस, वन ककड़ी, गुच्छी और ब्राह्मी जैसी औषधीय वनस्पतियां पाई जाती हैं। इसके अलावा अश्वगंधा, तुलसी, एलोवेरा, लेमनग्रास, सर्पगंधा, कालमेघ और सतावर जैसे पौधों की भी औषधीय उपयोगिता है। प्रदेश में औषधीय पौधों की उपलब्धता और उनकी खेती की संभावनाओं को देखते हुए किसानों के लिए बाजार से जुड़ना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयुष विभाग की इस पहल से औषधीय पौधों की खेती करने वाले किसानों को संगठित बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में मदद मिल सकती है। किसानों और कंपनियों के बीच सीधा संपर्क बढ़ने से प्रदेश में औषधीय पौधों के उत्पादन और विपणन को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।


