इंटरनेशनल हेल्थ डायलॉग 2026 में भारत का निर्णायक नेतृत्व

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जब भारत बना मरीज़ सुरक्षा का ग्लोबल लीडर

(अनिल बेदाग)

छत्तीसगढ़ रिपोर्टर

मुंबई 02 फरवरी 2026। जब दुनिया भर के हेल्थकेयर लीडर्स एक मंच पर इकट्ठा होते हैं और चर्चा का केंद्र मरीज़ की सुरक्षा बनती है, तब यह सिर्फ़ एक सम्मेलन नहीं रहता, वह एक वैश्विक दिशा तय करने वाला संवाद बन जाता है। यही दृश्य हैदराबाद में शुरू हुए इंटरनेशनल हेल्थ डायलॉग 2026 में देखने को मिला, जहां भारत ने मरीज़ सुरक्षा के लिए विश्वस्तरीय दृष्टिकोण का नेतृत्व करते हुए पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। ‘ग्लोबल वॉइसेज़, वन विज़न’ थीम पर आधारित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के पहले दिन का फोकस पूरी तरह मरीज़ सुरक्षा पर रहा। देश-विदेश से आए चिकित्सकों, नीति-निर्माताओं, मरीज़ सुरक्षा लीडर्स और प्रत्यायन विशेषज्ञों ने इस बात पर एक स्वर में सहमति जताई कि बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य सेवाएं देने में भारत का अनुभव आज वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली के लिए एक मॉडल बन चुका है। सम्मेलन की शुरुआत करते हुए डॉ. संगीता रेड्डी, जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर, अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप ने कहा,“हमारे अस्पतालों और सिस्टम में रोज़ नए इनोवेशन हो रहे हैं। अगर हम हर दिन कुछ नया सीख रहे हैं, तो यह ज्ञान सिर्फ़ हमारे सिस्टम तक सीमित क्यों रहे? इसे दुनिया के साथ साझा किया जाना चाहिए।

डॉ. मधु ससिधर, प्रेसिडेंट एवं सीईओ, हॉस्पिटल्स डिविजन, अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइज़ लिमिटेड ने साझा स्वामित्व और संगठनात्मक जवाबदेहिता पर ज़ोर देते हुए कहा, “मरीज़ की सुरक्षा किसी एक विभाग या हितधारक की जिम्मेदारी नहीं है। यह लीडरशिप की जिम्मेदारी है, जिसे पूरे संगठन को अपनाना होगा। वैश्विक परिप्रेक्ष्य रखते हुए डॉ. कार्सटन इंगल, सीईओ, इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर क्वालिटी इन हेल्थकेयर ने कहा कि मरीज़ सुरक्षा दशकों से एजेंडा का हिस्सा रही है, लेकिन अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है। उन्होंने नेताओं से अपील करते हुए कहा, “यह मत पूछिए कि किसी ने क्या किया या क्या करना चाहिए था। यह पूछिए कि उन्होंने उस समय क्या सोचकर वह कदम उठाया।

डॉ. अतुल मोहन कोचर, सीईओ, नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स ने मरीज़ सुरक्षा को सिर्फ़ तकनीकी नहीं, बल्कि नैतिक, सामाजिक और आर्थिक अनिवार्यता बताया। उन्होंने स्पष्ट कहा, “सिर्फ़ नीतियां बनाने से मरीज़ सुरक्षित नहीं होते। निष्पादन की दक्षता ज़रूरी है। हमें शून्य नुकसान के लक्ष्य को अपनाना होगा। इंटरनेशनल हेल्थ डायलॉग 2026 का पहला दिन इस स्पष्ट संदेश के साथ समाप्त हुआ कि मरीज़ सुरक्षा अब विकल्प नहीं, बल्कि प्राथमिकता है और इस वैश्विक मिशन में भारत सिर्फ़ सहभागी नहीं, बल्कि नेतृत्वकर्ता की भूमिका में खड़ा है।

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