औद्योगिक हब के विस्तार को मिलेगी रफ्तार

छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
पीलीभीत, 17 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर स्थित मझोला क्षेत्र को औद्योगिक गतिविधियों के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में बुनियादी सुविधाएं मजबूत की जा रही हैं। यहां उद्योगों के विस्तार, कारोबारियों की आवाजाही और माल की ढुलाई को आसान बनाने के लिए सड़क नेटवर्क को बेहतर किया जा रहा है। इसी क्रम में उत्तराखंड की सीमा पर करीब एक करोड़ रुपये की लागत से उत्तर प्रदेश की पहचान दर्शाने वाला प्रवेश द्वार बनाया गया है।
वहीं, मझोला-बिरहनी भरापचपेड़ा सितारगंज तक करीब 13 किलोमीटर लंबे फोरलेन मार्ग का निर्माण तेजी से कराया जा रहा है। इस परियोजना पर 68 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसी परियोजना के तहत रास्ते में पड़ने वाली परवीन नदी पर 48 मीटर लंबा पुल भी बनाया जा रहा है। बेहतर सड़क संपर्क से क्षेत्र में नए उद्योग स्थापित करने, निवेश आकर्षित करने और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। मझोला की भौगोलिक स्थिति इसे औद्योगिक विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाती है। उत्तराखंड की सीमा से सटे होने के कारण यहां से दोनों प्रदेशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं हैं।
आवाजाही होगी आसान
औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने के साथ कारोबारियों को ऐसे मार्गों की जरूरत होगी, जिनसे कच्चे माल की आपूर्ति, तैयार उत्पादों की ढुलाई और कर्मचारियों की आवाजाही आसानी से हो सके। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए सड़क चौड़ीकरण और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर काम कराया जा रहा है। फोरलेन मार्ग तैयार होने के बाद भारी वाहनों के आवागमन को बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है। इससे उद्योग लगाने के इच्छुक उद्यमियों के लिए भी क्षेत्र की उपयोगिता बढ़ सकती है।
उत्तराखंड की सीमा पर यूपी की पहचान दिखाएगा प्रवेश द्वार
उत्तराखंड की सीमा पर बनाया गया प्रवेश द्वार इस क्षेत्र की नई पहचान के रूप में सामने आया है। द्वार पर उत्तर प्रदेश की पहचान को दर्शाया गया है। सीमा पर आने-जाने वाले लोगों और कारोबारियों को इससे प्रदेश में प्रवेश का संकेत मिलेगा। इसके साथ ही यह निर्माण मझोला क्षेत्र में विकसित हो रही औद्योगिक गतिविधियों के बीच आधारभूत सुविधाओं में किए जा रहे बदलाव को भी दर्शाता है। औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार के साथ सीमा पर बेहतर संपर्क मार्ग और व्यवस्थित प्रवेश व्यवस्था की अहमियत बढ़ जाती है।
आवागमन और अधिक सुविधाजनक होगा
मझोला से सितारगंज तक करीब 13 किलोमीटर लंबे मार्ग को फोरलेन बनाने की परियोजना पर 68 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड की ओर से यह काम कराया जा रहा है। सड़क चौड़ी होने से वाहनों की आवाजाही के लिए अधिक जगह मिलेगी। अभी जिन परिस्थितियों में वाहनों को सीमित सड़क पर गुजरना पड़ता है, वहां चौड़ी सड़क बनने के बाद आवागमन अधिक सुविधाजनक हो सकेगा। विशेष रूप से औद्योगिक इकाइयों तक माल पहुंचाने वाले ट्रक और अन्य व्यावसायिक वाहनों को इसका लाभ मिलने की संभावना है। इस मार्ग का महत्व केवल दो स्थानों के बीच दूरी तय करने तक सीमित नहीं है। मझोला में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार होने पर कच्चे माल की आपूर्ति से लेकर तैयार उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए बेहतर सड़क संपर्क जरूरी होगा। सितारगंज और आसपास के व्यापारिक क्षेत्रों से संपर्क मजबूत होने पर कारोबारी आपूर्ति व्यवस्था को अधिक सुविधाजनक बना सकेंगे।
बजट के अभाव में दो साल पहले रुक गया था काम
फोरलेन निर्माण की प्रक्रिया करीब दो साल पहले शुरू हुई थी, लेकिन बजट की कमी के कारण काम बीच में बंद हो गया। धनराशि उपलब्ध नहीं होने से परियोजना की गति प्रभावित हुई और निर्माण पूरा होने में देरी हुई। अब बजट मिलने के बाद काम दोबारा तेज कर दिया गया है। विभाग की ओर से निर्माण को आगे बढ़ाया जा रहा है। लंबे समय से इस मार्ग के बेहतर होने की प्रतीक्षा कर रहे लोगों और कारोबारियों के लिए काम दोबारा शुरू होना राहत की बात है।

