देर से मिली एंबुलेंस; अस्पताल पर हंगामा

छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
गोरखपुर, 06 सितंबर 2026। राजघाट स्थित बैकुंठ धाम में रविवार को अचानक गुंबद गिरने से नीचे बैठे अधिवक्ता की मौत हो गई जबकि एक लोग घायल हो गए। बताया जा रहा है कि रविवार को अचानक अंतिम संस्कार में शामिल होने आए लोगों के बैठने के लिए बने चबूतरे की छत उनके ऊपर ही भरभराकर गिर गई। हादसे में छत के नीचे बैठे दो लोग मलबे में दबकर घायल हो गए। दोनों को तत्काल जिला अस्पताल भेजा गया, जहां उनका उपचार कराया जा रहा है। उपचार के दौरान एक घायल की मौत हो गई।
घटना रविवार सुबह करीब 11:45 बजे की है। पुलिस को सूचना मिली कि राजघाट बैकुंठ धाम में बने गुंबद के चबूतरे की छत क्षतिग्रस्त होकर गिर गई है। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी गौरव वर्मा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। वहां चबूतरे की छत पूरी तरह गिरी हुई थी और उसके नीचे दो लोग दबे थे।
पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से दोनों को मलबे से बाहर निकाला और तत्काल इलाज के लिए जिला अस्पताल भिजवाया। घायल आलोक अस्थाना (40) राप्तीनगर, थाना शाहपुर और संजय सिंह (42) शक्तिनगर कॉलोनी, थाना शाहपुर के निवासी बताए गए हैं। इनमें आलोक अस्थाना की उपचार के दौरान मौत हो गई जबकि दूसरे गंभीर रुप से घायल संजय सिंह को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। बताया गया कि दोनों लोग अधिवक्ता विनोद त्रिपाठी की माता के अंतिम संस्कार में शामिल होने बैकुंठ धाम पहुंचे थे। इसी दौरान बारिश के साथ बिजली गिरने से चबूतरे की छत क्षतिग्रस्त होकर नीचे गिर गई। घटना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली।
वहीं, परिजन का आरोप है कि राजघाट पर टाइम से एंबुलेंस नहीं पहुंची। इसके बाद परिजन आलोक अस्थाना को पीकअप और संजय सिंह को ई रिक्शा में लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। आरोप है कि यहां पर डॉक्टर नहीं थे, फोन करने पर भी नहीं उठाए।इसके बाद बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया तो वहां लेकर जाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिली। आधे घंटे तक इंतजार के बाद एम्बुलेंस आई तो आलोक अस्थाना को भेजा गया। वहां पहुंचने पर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। उनके सिर पर गंभीर चोट लगी थी। करीब एक भी संजय सिंह को एंबुलेंस से बीआरडी मेडिकल कॉलेज भेजा गया, जहां उनका उपचार चल रहा है।उनके हाथ और पैर में चोट लगी है। परिजनों ने घटना को लेकर राजघाट थाने में तहरीर दी है।, इधर अधिवक्ता की मौत के बाद जिला अस्पताल पर अधिवक्ताओं ने हंगामा किया। अधिवक्ताओं ने सीएमओ पर एएफआई दर्ज करने की मांग की।
मौके पर पहुंचे एडीएम ने परिवार को पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता, मुकदमा दर्ज कर क्राइम नंबर देने और मुख्यमंत्री राहत कोष से धन देने का आश्वासन दिया। इसके बाद अधिवक्ताओं ने मुकदमे की कॉपी मिलने के बाद शव ले जाने का आश्वासन दिया है। अधिवक्ता जिला अस्पताल में ही धरने पर बैठे हैं। बताया जा रहा है कि इस दौरान नाराज एक अधिवक्ता ने खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगाने की भी कोशिश की। लेकिन पुलिस ने नियंत्रित कर रोक लिया।


