झारखंड कांग्रेस में बगावत के सुर, 5 विधायक दिल्ली पहुंचे…हेमंत सोरेन सरकार की बढ़ी मुश्किलें

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छत्तीसगढ़ रिपोर्टर

रांची 23 जनवरी 2026। झारखंड की राजनीति में इन दिनों सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। सत्तारूढ़ महागठबंधन की अहम सहयोगी पार्टी कांग्रेस के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के पांच विधायक रांची छोड़कर दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं, जिससे हेमंत सोरेन सरकार और कांग्रेस संगठन दोनों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

“अगर इतने लंबे संघर्ष के बाद भी उन्हें जिम्मेदारी नहीं मिलेगी, तो…”
दिल्ली पहुंचे कांग्रेस विधायकों में राजेश कच्छप, नमन विक्सल कोंगड़ी, भूषण बाड़ा, सोनाराम सिंकु और सुरेश बैठा शामिल हैं। इन विधायकों का कहना है कि हेमंत सोरेन सरकार में कांग्रेस कोटे से बने मंत्री उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लेते। उनका आरोप है कि जब पार्टी के अपने विधायक ही मंत्रियों तक अपनी बात नहीं पहुंचा पा रहे हैं, तो आम कार्यकर्ताओं और जनता की समस्याएं कैसे सुनी जा रही होंगी। सूत्रों के मुताबिक, इन विधायकों ने अपनी नाराजगी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं—पार्टी प्रभारी गुलाम अहमद मीर, महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और झारखंड प्रभारी प्रणव झा के सामने रखी है।

विधायकों की मांग है कि सरकार में संतुलन बनाए रखने के लिए अनुभवी और योग्य कांग्रेस विधायकों को मंत्री पद का मौका मिलना चाहिए। कुछ विधायकों ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि वे उच्च शिक्षित हैं, किसी के पास डबल एमए की डिग्री है और कई लोग 20–25 साल से पार्टी के लिए काम कर रहे हैं। उनका सवाल है कि अगर इतने लंबे संघर्ष के बाद भी उन्हें जिम्मेदारी नहीं मिलेगी, तो पार्टी के प्रति निष्ठा का क्या महत्व रह जाएगा।

“सरकार जनता के मुद्दों को लेकर गंभीर नहीं है”
इस पूरे मामले को लेकर भाजपा ने कांग्रेस और हेमंत सरकार पर निशाना साधा है। भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि कांग्रेस विधायकों की नाराजगी सरकार के लिए एक चेतावनी है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री ऐशो-आराम में डूबे हुए हैं और उनके सरकारी आवास आम जनता की पहुंच से बाहर हैं। भाजपा का कहना है कि सरकार जनता के मुद्दों को लेकर गंभीर नहीं है। वहीं कांग्रेस नेतृत्व ने इन खबरों को गलत बताया है। प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और पार्टी प्रवक्ता सतीश मुन्जिनी ने कहा कि पार्टी में सब कुछ सामान्य है। उनके मुताबिक, हेमंत सोरेन सरकार पूरी गंभीरता से काम कर रही है और मैया सम्मान योजना व 200 यूनिट मुफ्त बिजली जैसे वादों को पूरा किया गया है।

प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी कहा कि विधायक संगठन से जुड़े कामों को लेकर दिल्ली गए हैं। उन्होंने बताया कि झारखंड में एसआईआर लागू होना है और हर बूथ पर बीएलओ की नियुक्ति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी विधायकों को दी गई है, ताकि किसी भी सही मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से न हटे। हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार समेत कई राज्यों में चुनावी प्रदर्शन कमजोर रहने के बाद कांग्रेस पहले से दबाव में है। ऐसे में झारखंड के विधायकों की नाराजगी पार्टी नेतृत्व के लिए एक नई चुनौती बनती नजर आ रही है।

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