‘मेरे जीवन के आदर्शों-सिद्धांतों का सम्मान’; भारत रत्न के एलान के बाद भावुक हुए लालकृष्ण आडवाणी

Chhattisgarh Reporter
शेयर करे

छत्तीसगढ़ रिपोर्टर

नई दिल्ली 03 फरवरी 2024। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न से नवाजा जाएगा। केंद्र सरकार ने उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने का एलान किया है। जिसके बाद से तमाम भाजपा नेताओं ने खुशी की लहर है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तस्वीर साझा करते हुए इस फैसले की जानकारी दी।  ‘भारत रत्न’ की घोषणा के बाद सीएम योगी, नीतीश कुमार, मनोहर लाल खट्टर समेत कई केंद्रीय मंत्रियों ने इसे खुशी का क्षण बताया। लालकृष्ण आडवाणी ने सम्मान पर कहा कि यह मेरे लिए गौरवान्वित करने वाला पल है। 

मैं इस सम्मान को स्वीकार करता हूं- आडवाणी
वहीं भारत रत्न के एलान के बाद 96 वर्षीय लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि मैं अत्यंत विनम्रता और कृतज्ञता के साथ इस सम्मान को स्वीकार करता हूं। उन्होंने कहा कि यह न केवल एक व्यक्ति के रूप में मेरे लिए सम्मान है, बल्कि उन आदर्शों और सिद्धांतों का सम्मान है जिनकी मैंने अपनी पूरी क्षमता से जीवनभर सेवा की है। उन्होंने कहा कि आदर्श वाक्य ‘यह जीवन मेरा नहीं है, यह मेरे राष्ट्र के लिए है’  ने मेरा जीवन को प्रेरित किया है। उन्होंने कहा कि आज मैं दो लोगों (पंडित दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी) को कृतज्ञतापूर्वक याद करता हूं, जिनके साथ मैंने काम किया है। साथ ही उन्होंने इस सम्मान के लिए राष्ट्रपति द्रौपद्री मुर्मू, पीएम मोदी का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने अपने परिवार के सभी सदस्यों, अपनी दिवंगत पत्नी कमला के प्रति अपनी गहरी भावनाएं व्यक्त करता हूं। 

‘हाथ हिलाकर लोगों का किया अभिवादन’
सर्वोच्च नागरिक सम्मान के लिए नाम की घोषणा के बाद लालकृष्ण आडवाणी ने घर से हाथ हिलाकर लोगों और मीडियाकर्मियों का अभिवादन किया। इस दौरान इनकी बेटी प्रतिभा आडवाणी भी उनके साथ नजर आ रही है। लालकृष्ण आडवाणी के बेटी प्रतिभा ने उन्हें मिठाई खिलाकर मुंह मीठा किया, साथ ही गले लगाकर उन्हें बधाई दी 

विभाजन के बाद पाकिस्तान से भारत आया था आडवाणी का परिवार
लालकृष्ण आडवाणी का जन्म पाकिस्तान के कराची में 8 नवंबर 1927 को एक हिंदू सिंधी परिवार में हुआ था। आडवाणी की शुरुआती शिक्षा कराची के सेंट पैट्रिक हाई स्कूल से हुई थी। भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद आडवाणी का परिवार पाकिस्तान छोड़कर भारत के मुंबई में आकर बस गया। आडवाणी विभाजन से पहले से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े थे और भारत आने के बाद वे आरएसएस के प्रचारक बन गए। आरएसएस के साथ उन्होंने राजस्थान में काम किया। साल 1957 में आडवाणी जनसंघ के लिए काम करने के लिए दिल्ली आ गए। दिल्ली में आडवाणी अटल बिहारी वाजपेयी के घर में ही रहे थे।

Leave a Reply

Next Post

स्कूल ब्रेक में चौथी कक्षा के छात्र की बेरहमी से हत्या, बड़े भाई ने पहले ईटों से सिर कुचला फिर गले में घोंपा सरिया

शेयर करे छत्तीसगढ़ रिपोर्टर बालोद 03 फरवरी 2024। छत्तीसगढ़ के बालोद में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है जहां, बड़े भाई ने अपने 9 साल के छोटे भाई की स्कूल ब्रेक टाइम बेरहमी से हत्या कर दी। आरोपी ने बच्चे के सिर को पहले ईंटों से कुचला फिर उसके गले […]

You May Like