
छत्तीसगढ़ रिपोर्टर
रायपुर, 23 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन 2026 में डीएपी उर्वरक की राष्ट्रीय स्तर पर सीमित उपलब्धता के बावजूद सरकार ने किसानों को खाद-बीज की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए निगरानी और कार्रवाई तेज कर दी है। सरकार का कहना है कि किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के साथ-साथ कालाबाजारी, जमाखोरी और निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है।
कृषि विभाग के अनुसार, खरीफ सीजन 2026 के लिए प्रदेश में 3 लाख मीट्रिक टन डीएपी का लक्ष्य तय किया गया है। 21 जुलाई तक राज्य में 1 लाख 84 हजार 413 मीट्रिक टन डीएपी का भंडारण किया जा चुका है। इनमें से 1 लाख 26 हजार 360 मीट्रिक टन किसानों को वितरित किया गया है, जबकि 58 हजार 54 मीट्रिक टन डीएपी अभी भी समितियों और गोदामों में उपलब्ध है। विभाग का दावा है कि पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में इस बार डीएपी का स्टॉक अधिक है।
कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार किसानों को केवल डीएपी पर निर्भर रहने के बजाय एनपीके और अन्य संतुलित उर्वरकों के उपयोग के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि फसलों को संतुलित पोषण मिल सके और डीएपी की मांग का दबाव कम हो।
विभाग ने बताया कि देश में डीएपी का लगभग 70 से 80 प्रतिशत और एनपीके का 30 से 40 प्रतिशत आयात किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति प्रभावित होने और वैश्विक परिस्थितियों के कारण उर्वरकों की उपलब्धता और कीमतों पर असर पड़ा है। इसी वजह से उर्वरक कंपनियों ने भारत सरकार की नीति के अनुरूप एनपीके के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में संशोधन किया है।
हालांकि कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि उर्वरकों के मूल्य तय करना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं है, लेकिन किसानों से निर्धारित एमआरपी से अधिक कीमत वसूलने वालों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत निरीक्षण अभियान चलाकर अनियमितताओं पर सख्ती बरती जा रही है।
अब तक प्रदेशभर में 4,878 उर्वरक विक्रय केंद्रों की जांच की जा चुकी है। इस दौरान 625 नोटिस जारी, 183 केंद्रों पर बिक्री प्रतिबंध, 98 केंद्रों से उर्वरक जब्त, 97 लाइसेंस निलंबित और 11 लाइसेंस निरस्त किए गए हैं। इसके अलावा 56 मामले न्यायालय में प्रस्तुत किए गए हैं, जबकि 7 मामलों में एफआईआर भी दर्ज की गई है।
लगातार हो रही बारिश के कारण जिन क्षेत्रों में बोनी प्रभावित हुई है या किसानों को दोबारा बुआई करनी पड़ रही है, वहां जिला प्रशासन और कृषि विभाग विशेष निगरानी रख रहे हैं। प्रभावित किसानों को तकनीकी सलाह, बीज और उर्वरक उपलब्ध कराने के साथ शासन के प्रावधानों के अनुसार आवश्यक सहायता भी दी जा रही है।


